विद्या मितान: एक पैर पर खड़े होकर जताया विरोध
भिलाई । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे राज्य अतिथि शिक्षकों (विद्यामितान) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगों को लेकर प्रदेशभर के हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं. राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ के बैनर तले बीते 1 जुलाई से शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन आंदोलन सोमवार को छठे दिन भी जारी रहा.
दुर्ग सहित कई जिलों में बारिश के बावजूद शिक्षक धरना स्थल पर डटे रहे. इस दौरान सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए प्रदर्शनकारियों ने एक पैर पर खड़े होकर अनोखे अंदाज में नारेबाजी की और अपना आक्रोश व्यक्त किया.
आंदोलनकारी शिक्षकों का साफ कहना है कि वे पिछले करीब 10 वर्षों से राज्य के सुदूर और आदिवासी अंचलों के सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को संभाल रहे हैं. इसके बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है. नियमित शिक्षकों के समान ही पूरी जिम्मेदारी से कार्य करने के बाद भी उन्हें हर महीने महज 20 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है, जो साल में सिर्फ 10 महीनों के लिए ही मिलता है.
इतना ही नहीं, हर नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में उन्हें दोबारा बहाली के लिए असमंजस और डर के साए में जीना पड़ता है. नियमित शिक्षकों की तुलना में उन्हें न तो सेवा सुरक्षा हासिल है और न ही ग्रीष्मकालीन अवकाश, मातृत्व-पितृत्व अवकाश या अन्य कोई शासकीय सुविधाएं मिलती हैं. इतने कम मानदेय में आज के दौर में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो चुका है.
अपनी इन दिक्कतों को लेकर रविवार को शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा और आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया था. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पैदल मार्च करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास स्थान पहुंचे और उनके बंगले का घेराव कर दिया.
अतिथि शिक्षकों ने बताया कि विधानसभा चुनाव के वक्त उन्हें संविलियन या समायोजन का स्पष्ट भरोसा दिलाया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
बरसों से सिर्फ आश्वासन मिलने के कारण ही अब वे आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. संघ के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार संविलियन, समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा पर कोई लिखित व ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना समाप्त नहीं होगा.