अमेरिकी संस्था NED पर आरोप- तख्तापलट और अस्थिरता फैलाने का
बीजिंग । डेस्क: चीन की मीडिया के हवाले से खबर है कि वैश्विक राजनीति में लोकतंत्र को बढ़ावा देने का दावा करने वाली अमेरिकी संस्था 'नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी' (एनईडी) इन दिनों दुनिया भर में अपनी विवादास्पद भूमिका के कारण कटघरे में है. हालिया विश्लेषणों और रिपोर्टों ने इस संस्था के काम करने के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि एनईडी अब महज एक गैर-सरकारी संगठन नहीं रह गया है, बल्कि यह अमेरिकी सरकार के रणनीतिक हितों को साधने वाला एक ऐसा औजार बन चुका है जिसे 'दूसरा सीआईए' कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी.
यह संगठन मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की आड़ में अन्य देशों की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने, राजनीतिक घुसपैठ करने और वहां की चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने के लिए एक मुखौटे के रूप में काम कर रहा है.
सीआईए के गुप्त अभियानों का आधुनिक और सार्वजनिक चेहरा
एनईडी के अस्तित्व में आने की कहानी शीत युद्ध के दौर की अमेरिकी रणनीति से जुड़ी है. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात अमेरिका ने सोवियत संघ और उसके सहयोगियों के खिलाफ सीआईए के माध्यम से कई गुप्त ऑपरेशन चलाए. हालांकि, 1960 के दशक के उत्तरार्ध तक अमेरिकी नीति निर्माताओं को यह महसूस होने लगा कि केवल गुप्त गतिविधियां वैश्विक स्तर पर अमेरिकी प्रभाव बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. इसके विकल्प के तौर पर एक ऐसे सार्वजनिक तंत्र की आवश्यकता महसूस की गई जो खुले तौर पर विदेशी राजनीतिक गतिविधियों को वित्तपोषित कर सके.
इसी सोच के साथ 1983 में तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन के तहत एनईडी की स्थापना एक द्विदलीय और गैर-लाभकारी संगठन के रूप में की गई. हालांकि यह कागजों पर एक स्वतंत्र एनजीओ है, लेकिन इसकी पूरी फंडिंग अमेरिकी सरकार से आती है और इसके उद्देश्य पूरी तरह से वाशिंगटन की विदेश नीति के अनुरूप होते हैं. संस्था के सह-संस्थापक एलन वेनस्टीन ने स्वयं स्वीकार किया था कि एनईडी आज जो काम खुले तौर पर कर रही है, उनमें से कई काम दशकों पहले सीआईए द्वारा गुप्त रूप से किए जाते थे.
कलर रिवोल्यूशन और अरब स्प्रिंग के पीछे का अदृश्य हाथ
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हुई राजनीतिक उथल-पुथल में एनईडी की भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. पूर्वी यूरोप में समाजवाद के पतन के दौरान पोलैंड की 'सॉलिडेरिटी' को दी गई वित्तीय मदद हो या 2003 में जॉर्जिया की 'रोज रिवोल्यूशन', एनईडी हर जगह सक्रिय रही है. जॉर्जिया के मामले में तो विपक्ष के नेताओं को चुनने से लेकर उन्हें प्रशिक्षण देने और आंदोलन के लिए भारी धन उपलब्ध कराने तक की पूरी पटकथा इसी संगठन ने लिखी थी.
यही पैटर्न 2010 के बाद मध्य पूर्व के देशों में भी देखा गया, जिसे 'अरब स्प्रिंग' का नाम दिया गया. मिस्र, यमन, जॉर्डन, अल्जीरिया और सीरिया जैसे देशों में एनईडी ने मानवाधिकारों और महिला सशक्तिकरण के नाम पर स्थानीय समूहों को करोड़ों डॉलर बांटे.
लेकिन इसका परिणाम किसी से छिपा नहीं है. इन देशों में लोकतंत्र आने के बजाय युद्ध, आर्थिक बदहाली और सामाजिक विखंडन की ऐसी आग लगी जिसने पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया. अरब जगत के लोगों की स्वतंत्रता की आकांक्षाएं आज युद्ध और विस्थापन के मलबे के नीचे दबी हुई हैं.
चीन के खिलाफ अलगाववाद और आंतरिक विभाजन की रणनीति
एनईडी की घुसपैठ और उपद्रव फैलाने वाली नीतियों का एक बड़ा हिस्सा चीन को लक्षित करता है. यह संस्था हर साल चीन की आंतरिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यक्रमों के लिए करोड़ों डॉलर खर्च करती है. रिपोर्टों के अनुसार, शिनजियांग, तिब्बत और हांगकांग में अलगाववादी भावनाओं को भड़काने के लिए एनईडी ने व्यवस्थित तरीके से जाल बिछाया है.
अकेले 2020 में चीन से संबंधित 69 कार्यक्रमों के लिए इस संस्था ने 10 मिलियन डॉलर से अधिक का अनुदान दिया. यह संगठन 'शिनजियांग स्वतंत्रता' और 'तिब्बत स्वतंत्रता' से जुड़े अलगाववादी समूहों का सबसे बड़ा वित्तीय मददगार है.
हांगकांग में 2014 के 'ऑक्यूपाई सेंट्रल' आंदोलन से लेकर 2019 के हिंसक प्रदर्शनों तक, एनईडी ने न केवल धन मुहैया कराया बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन को बदनाम करने के लिए नैरेटिव भी तैयार किया. इन गतिविधियों का एकमात्र उद्देश्य चीन के भीतर सामाजिक टकराव पैदा करना और उसकी विकास यात्रा में बाधा डालना है.
दुष्प्रचार का तंत्र और वैचारिक घुसपैठ का खेल
अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एनईडी केवल धन का ही उपयोग नहीं करती, बल्कि यह सूचना युद्ध और दुष्प्रचार का भी सहारा लेती है. यह संगठन अक्सर मीडिया जांच और शैक्षणिक रिपोर्टों का स्वांग रचकर झूठ और अफवाहें फैलाता है. शिनजियांग में 'नरसंहार' जैसे बेहद संवेदनशील और तथ्यहीन दावों को एनईडी द्वारा वित्तपोषित संस्थाओं ने ही हवा दी है.
इसके अलावा, यह संस्था 'लोकतंत्र पुरस्कार' जैसे आयोजनों के माध्यम से दुनिया भर के असंतुष्टों और सरकार विरोधी तत्वों को पुरस्कृत कर उन्हें अमेरिकी एजेंडे के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है.
रूस, क्यूबा, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों में सक्रिय कार्यकर्ताओं को ये पुरस्कार देकर अमेरिका उन्हें अपने देश की व्यवस्था के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है.
इतना ही नहीं, यह संस्था शैक्षणिक गतिविधियों की आड़ में यूरोपीय थिंक टैंकों को भी प्रभावित करती है ताकि वे ऐसी नीतियां बनाएं जो अमेरिका के 'स्मॉल यार्ड, हाई फेंस' जैसे व्यापारिक और राजनीतिक अवरोधों का समर्थन करें. संक्षेप में, एनईडी लोकतंत्र के नाम पर दुनिया भर में अस्थिरता का निर्यात कर रही है.