नाटो के 'सीक्रेट हेल्प' खुलासे से इटली में हंगामा
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा चलाए गए सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को लेकर पश्चिमी देशों के गठबंधन में आंतरिक दरारें अब पूरी तरह सतह पर आ गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय देशों पर सैन्य अभियान में साथ न देने का आरोप लगाने के बाद, नाटो (NATO) प्रमुख मार्क रुट ने एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है जिसने पूरे यूरोप, और विशेष रूप से इटली की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है. नाटो प्रमुख के इस 'सीक्रेट हेल्प' के खुलासे के बाद इटली की मेलोनी सरकार बैकफुट पर है और विपक्ष इसे संसद के साथ एक बड़ा धोखा बता रहा है.
नाटो प्रमुख का वो खुलासा जिससे मचा हड़कंप:
तनाव को कम करने के इरादे से वाशिंगटन पहुंचे नाटो महासचिव मार्क रुट ने एक टीवी इंटरव्यू में कुछ ऐसे आंकड़े और तथ्य सार्वजनिक कर दिए, जिन्होंने यूरोपीय देशों के सार्वजनिक स्टैंड की हवा निकाल दी. रुट ने खुलासा किया कि भले ही यूरोपीय देशों ने सीधे तौर पर युद्ध में अपनी सेनाएं नहीं भेजीं, लेकिन पर्दे के पीछे से उन्होंने अमेरिका को व्यापक और गुप्त रणनीतिक मदद (सीक्रेट हेल्प) पहुंचाई है.
नाटो प्रमुख के अनुसार, छह सप्ताह तक चले इस युद्ध के दौरान यूरोप के विभिन्न सैन्य ठिकानों से अमेरिका के लगभग 4,000 से 5,000 विमानों ने उड़ान भरी. उन्होंने साफ तौर पर इटली का नाम लेते हुए बताया कि अकेले इटली में स्थित सैन्य ठिकानों से अमेरिकी सेना के करीब 500 विमानों ने ईरान के खिलाफ अभियानों के लिए उड़ानें भरीं.
इसके अलावा रोमानिया ने भी अमेरिकी टैंकरों को जगह देने के लिए अपनी कमर्शियल उड़ानों तक को रोक दिया था.
इटली में सियासी भूचाल, बैकफुट पर मेलोनी सरकार:
इस खुलासे के बाद इटली की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया है. प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी लगातार देश की जनता और संसद के सामने यह दावा करती रही थीं कि इटली इस युद्ध का हिस्सा नहीं है और वह किसी भी आक्रामक कार्रवाई से दूर है. लेकिन नाटो प्रमुख द्वारा '500 अमेरिकी विमानों की उड़ान' के खुलासे ने मेलोनी सरकार के इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
विपक्षी दल अब सरकार पर संसद को गुमराह करने और देश को एक अघोषित युद्ध में धकेलने का आरोप लगा रहे हैं. विपक्षी नेता निकोला फ्रैतोइयान्नी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि या तो इटली की सरकार ने देश के सांसदों और जनता से झूठ बोला है, या फिर नाटो प्रमुख का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है.
विपक्ष अब इस मामले पर प्रधानमंत्री से संसद में तुरंत नए और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहा है.
रक्षा मंत्री की सफाई: 'सीक्रेट हेल्प' नहीं, यह केवल लॉजिस्टिक्स है:
विवाद को थमता न देख इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो को तुरंत सरकार के बचाव में उतरना पड़ा. उन्होंने नाटो प्रमुख मार्क रुट के बयान को पूरी तरह से भ्रामक और गुमराह करने वाला करार दिया. क्रोसेटो ने सफाई देते हुए कहा कि नाटो प्रमुख ने सामान्य तकनीकी और रसद उड़ानों को जानबूझकर युद्धक अभियानों के साथ जोड़कर पेश किया है, जिससे गलत संदेश गया.
रक्षा मंत्री ने दावा किया कि इटली ने केवल स्थापित द्विपक्षीय समझौतों (जो 1954 से लागू हैं) और अपने संविधान के दायरे में रहकर केवल गैर-आक्रामक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों की अनुमति दी थी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इटली के ठिकानों का इस्तेमाल किसी भी 'काइनेटिक' यानी सीधे सैन्य हमले के लिए नहीं किया गया था. गौरतलब है कि इटली में इस समय सिगोनेला नेवल एयर स्टेशन और एवियानो एयरबेस समेत करीब 120 अमेरिकी सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं.
ट्रंप की नाराजगी और यूरोप का दोहरा रवैया:
इस पूरे विवाद की जड़ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नाराजगी है, जो उन्होंने व्हाइट हाउस में नाटो प्रमुख के सामने जाहिर की थी. ट्रंप ने इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे सहयोगियों को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा था कि संकट के समय इन देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया. ट्रंप ने स्पेन के रुख को 'हॉरर शो' तक कह डाला था, क्योंकि स्पेन ने खुलकर इस युद्ध का विरोध किया था.
यूरोपीय देशों ने इस युद्ध से खुद को यह कहकर दूर रखने की कोशिश की थी कि "यह यूरोप की जंग नहीं है." उन्हें इस बात का भी डर था कि इस युद्ध का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है, क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने खुद ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया था जिसमें ईरान के परमाणु हथियार बनाने की बात कही जा रही थी.
इसके अलावा, युद्ध के दौरान नागरिक ठिकानों जैसे स्कूलों और अस्पतालों पर हुए हमलों से भी यूरोप असहज था. लेकिन नाटो प्रमुख के खुलासे ने यह साफ कर दिया कि सामने से मना करने वाले यूरोपीय देशों ने पीछे के रास्ते से अमेरिका के लिए अपने दरवाजे खोल रखे थे.
ईरान ने घेरा, नाटो को बताया युद्ध का अपराधी:
नाटो प्रमुख के इस बयान को ईरान ने लपक लिया है और इसे नाटो की "सक्रिय संलिप्तता" का कबूलनामा करार दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि नाटो देश इस अवैध युद्ध में बराबर के साझीदार थे.
ईरान का दावा है कि इस युद्ध में उनके 3,400 से अधिक नागरिक मारे गए और उनके तेल बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा. तेहरान ने अब इटली सहित उन सभी यूरोपीय देशों से जवाबदेही की मांग की है जिन्होंने अमेरिकी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के लिए अपने सैन्य ठिकाने उपलब्ध कराए थे.