आरोप: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री ने लिया 99 लाख सब्सिडी
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी अपनी ही मिनिस्ट्री के तहत आने वाली एक योजना से व्यावसायिक खीरा खेती परियोजना के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी लेने के मामले में विवादों में घिर गए हैं. विपक्षी दलों ने इसे हितों का टकराव और 'सरेआम लूट' बताते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखे हमले किए हैं, वहीं मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि इसमें कुछ भी गलत या अनियमित नहीं है.
यह पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें खुलासा हुआ कि भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) द्वारा संचालित मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टीकल्चर (MIDH) योजना के तहत मिली है.
गौरतलब है कि चौधरी कृषि राज्य मंत्री होने के नाते इस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष (ex-officio vice-president) भी हैं. यह योजना चुनिंदा सब्जियों और फूलों की बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी देती है, जिसकी अधिकतम सीमा एक परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये है.
भागीरथ चौधरी की सफाई
इन आरोपों पर सफाई देते हुए भाजपा नेता भागीरथ चौधरी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "मैं एक किसान हूँ और बचपन से ही खेती-किसानी से जुड़ा हुआ हूँ. राजनीति में आने से बहुत पहले से मैं कृषि क्षेत्र में सक्रिय हूँ. मैंने कुछ भी छिपाया नहीं है."
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस सब्सिडी के लिए साल 2018 में आवेदन किया था और अपने ऋण व सब्सिडी की पूरी जानकारी सार्वजनिक की थी. उन्होंने यह भी बताया कि वे इस फार्म का उपयोग अन्य किसानों को आधुनिक कृषि और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने के लिए करते हैं.
हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, इस योजना के तहत सब्सिडी के प्रस्तावों को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की एक अलग परियोजना मंजूरी समिति द्वारा पास किया जाता है, जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष (केंद्रीय कृषि मंत्री) या उपाध्यक्ष (कृषि राज्य मंत्री) शामिल नहीं होते हैं.
विपक्ष का तीखा हमला
इस खुलासे के बाद देश में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों पर सवाल उठाते हुए तंज कसा कि "भाजपा के लिए सब्सिडी की शुरुआत घर से ही होती है." उन्होंने आरोप लगाया कि चौधरी खुद ही आवेदक, खुद ही मंजूरी देने वाले अधिकारी और खुद ही इसके लाभार्थी हैं.
एक हिंदी कहावत का जिक्र करते हुए खेड़ा ने पूछा, "जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो फसल कैसे बचेगी?"
वहीं, माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने इस घटनाक्रम को 'डायरेक्ट फैमिली ट्रांसफर' (DFT) करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना को सत्ता में बैठे लोगों के फायदे का जरिया बना दिया है.
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष और शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के जाल में फंस चुकी है और भाजपा का 'करप्शन मॉडल' अब हर दिन बेनकाब हो रहा है.