शुक्र, 16 अक्टू. 2026

CGKhabar

अडानी के कोल ब्लॉक के खिलाफ टीएस ने भेजी FAC को चिट्ठी

केते एक्सटेंशन को लेकर टीएस ने भेजी FAC को चिट्ठी

C

CG Khabar

08 मई 2026, 02:29 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

केते एक्सटेंशन
केते एक्सटेंशन

अम्बिकापुर | संवाददाता : हसदेव अरण्य में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित और अडानी के एमडीओ वाली केते एक्सटेंसन कोल ब्लॉक को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा है कि इस नए खदान में लगभग 7 लाख पेड़ काटे जाएँगे जिससे न सिर्फ़ समृद्ध जंगल-जमीन, जैव विविधता, हसदेव नदी और बांगो जलाशय का विनाश होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ रेगिस्तान में तब्दील होगा.


शुक्रवार को फारेस्ट एडवायजरी कमेटी(FAC) की नई दिल्ली में बैठक के पहले पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने कमेटी से जुड़े सदस्यों से फोन कॉल पर बात की तथा ईमेल व वाट्सएप से कई दस्तावेज भेज कर ऐतिहासिक स्थल रामगढ़ के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में पहल करते हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है, जिसके माध्यम से केते एक्सटेंशन कोल माइन जो हसदेव अरंड कोल फील्ड्स का हिस्सा है के लिये फारेस्ट क्लीयरेंस नहीं देने अथवा रिजेक्ट करने की मांग की है.


पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने फोन कॉल पर तथा दस्तावेजों के माध्यम से जो बात रखी है, उनमें प्रमुख रूप से कहा है कि 1,742.155 हेक्टेयर जंगल की जमीन माइनिंग के लिये इस्तेमाल की जायेगी, जिससे लगभग 7 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जायेंगे जो एक पुराने और साफ-सुथरे जंगल का हिस्सा है. 


उन्होंने कहा है कि इस इलाके में माइनिंग की वजह से पास की रामगढ़ पहाड़ियों में कई दरारें आ गई हैं, जो एएसआई के सेंट्रल प्रोटेक्टेड स्मारक का हिस्सा है. पहाड़ी की एरियल दूरी 8 किमी है. लेकिन रिपोर्ट में इसे गलत तरीके से खनन स्थल से 10 किलोमीटर से ज्यादा दूर बताया गया है. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि खदान की दूरी पहाड़ी के सबसे पास वाले किनारे से नहीं, बल्कि सबसे दूर वाले किनारे से मापी गई थी, जहाँ प्राचीन गुफाएँ मौजूद हैं. अगर यह पहाड़ी गिर जाती है, तो रामगढ़ की प्राचीन गुफाएँ और मंदिर भी इसके साथ ही नष्ट हो जाएँगे.


पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने यह भी कहा है कि भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून ने माननीय NGT के आदेश पर 2021 में अपनी रिपोर्ट हसदेव अरण्य कोयला क्षेत्र, छत्तीसगढ़ में चुनिंदा जीव समूहों पर विशेष ज़ोर के साथ जैव विविधता का आकलन(खंड II) सौंपी थी. इस रिपोर्ट में WII साफ तौर पर यह सिफारिश की है कि PEKB-I को छोड़कर, बाकी सभी नई खदानों के लिए केते एक्सटेंशन को खनन के लिये नो गो एरिया घोषित किया जाए.


उन्होंने कहा कि ICFRE, देहरादून द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पूरे हसदेव-अरण्य कोयला क्षेत्र में जैव विविधता का अध्ययन, जिसमें छत्तीसगढ़ के तारा, परसा, परसा ईस्ट और कांता बासेन, और केते एक्सटेंशन कोयला ब्लॉक शामिल हैं (खंड-I 2021) में भी साफ तौर पर यह सुझाव दिया गया है कि वे सभी कोयला ब्लॉक जो ‘चोरनाई वाटरशेड’ का हिस्सा हैं. जो हसदेव नदी के लिए एक बेहद ज़रूरी जलग्रहण क्षेत्र है. वहां खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी जानी चाहिए. ‘केते एक्सटेंशन’ कोयला ब्लॉक का 90% इलाका ‘चोरनाई वाटरशेड’ के अंतर्गत आता है. इसके बावजूद, इस इलाके में खनन की अनुमति किसी भी पर्यावरणीय आधार पर नहीं दी जा रही है, बल्कि सिर्फ इसलिए दी जा रही है क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि इसे मंज़ूरी मिलने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है, जो कि पूरी तरह से गलत और अनुचित है.


पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने यह भी कहा है कि यह जंगल हाथियों के रहने के लिए एक बेहद अहम जगह है और ‘लेमरू हाथी अभ्यारण्य’ के बफर ज़ोन (सुरक्षित सीमा) में आता है. इस इलाके में खनन शुरू होने के बाद, यानी 2014 के बाद से, इस क्षेत्र में इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष की घटनाएँ काफी बढ़ गई हैं.


टीएस सिंहदेव ने फारेस्ट एडवायजरी कमेटी का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट किया कि 26 जुलाई, 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के हसदेव अरंड कोयला क्षेत्र में कोयला खनन के खिलाफ और नई कोयला खदानों को रद् करने के खिलाफ एकमत से प्रस्ताव पारित किया गया. इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट को दिए एक एफिडेविट में छत्तीसगढ़ के फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने कहा है "अभी चल रही PEKB माइन में अभी भी 350 मिलियन टन कोयले का डिपॉजिट है, जिसकी माइनिंग होनी बाकी है. यह डिपॉजिट लगभग 20 सालों तक 4340MW के लिंक्ड पावर प्लांट्स की पूरी कोयले की डिमांड को पूरा करने के लिए काफी है. इसलिए, माइनिंग के लिए कोई नया माइनिंग रिजर्व एरिया देने और इस्तेमाल करने की कोई जरूरत नहीं है."


टी एस सिंह देव ने भेजी गई समस्त दस्तावेज की कॉपी भी भेजते हुए यह निवेदन किया है कि ऐतिहासिक रामगढ़ स्थल के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता है. पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि फारेस्ट एडवायजरी कमेटी इन बिन्दूओं पर गंभीरता से विचार करेगी और ऐतिहासिक स्थल रामगढ़ को संरक्षित करने हेतु आवश्यक कदम उठायेगी.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP