गंगरेल बांध प्रभावितों का जल सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी, 9 की तबीयत बिगड़ी
धमतरी । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गंगरेल बांध निर्माण के समय अपने घर और जमीन गंवाने वाले 52 गांवों के विस्थापित परिवार एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. गंगरेल जलाशय के पानी में उतरकर आंदोलन कर रहे डुबान प्रभावितों के जल सत्याग्रह का तीसरा दिन है. लगातार पानी में खड़े रहने के कारण नौ आंदोलनकारियों का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया, जिन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने दुख जताते हुए कहा कि आंदोलन के तीन दिन बीत जाने और सहयोगियों का स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद शासन-प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा उनका हाल जानने तक नहीं पहुंचा है. इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल स्थानीय जिला प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है.
डुबान संघर्ष समिति का कहना है कि प्रभावित ग्रामीण पिछले कई दशकों से अपने उचित पुनर्वास और व्यवस्थापन के अधिकार के लिए लगातार गुहार लगा रहे हैं. मामले में लगभग छह साल पहले माननीय उच्च न्यायालय ने भी विस्थापितों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य शासन और धमतरी जिला प्रशासन को त्वरित व्यवस्थापन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.
इसके बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा के चलते छह वर्षों से यह आदेश कागजों में ही दबा हुआ है. अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुके ग्रामीणों का आरोप है कि शासन के इस रवैये से वे खुद को ठगा और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरन यह कड़ा कदम उठाना पड़ा.
संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हरिशंकर मरकाम के अनुसार जब तक हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए विस्थापितों के स्थाई व्यवस्थापन का ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है.
गंगरेल बांध के कारण अपना सब कुछ खो चुके सैकड़ों परिवारों का भविष्य आज भी अनिश्चितता के भंवर में फंसा हुआ है. अब देखना यह होगा कि अस्पताल पहुंचे आंदोलनकारियों और जल सत्याग्रह की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र डुबान पीड़ितों की न्यायसंगत मांगों पर क्या रुख अपनाता है.