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भारत, चीन और रूस के बीच त्रिपक्षीय गठजोड़ की संभावना

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31 अग. 2025, 06:57 PM 5 मिनट में पढ़ें 1

मोदी-शी-पुतिन
मोदी-शी-पुतिन

तियानजिन । डेस्क: शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं. इस बैठक में वैश्विक नजरें खास तौर पर मोदी, पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर टिकी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियों के बीच इन तीनों नेताओं का एक साथ होना कई लोगों को केवल एक सम्मेलन में भागीदारी से ज्यादा लग रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की टैरिफ नीति के खिलाफ भारत, चीन और रूस एक त्रिपक्षीय गठजोड़ बना सकते हैं.


पुतिन ने की ट्रम्प की नीतियों की आलोचना

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चीन पहुंचते ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रम्प की टैरिफ नीति की कड़ी आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि ब्रिक्स समूह के देशों पर अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाना 'भेदभावपूर्ण' होगा. पुतिन ने यह भी कहा कि रूस और चीन इस भेदभाव के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ेंगे. उल्लेखनीय है कि भारत भी ब्रिक्स समूह का एक प्रमुख सदस्य है. हाल ही में ट्रम्प ने ब्रिक्स को अमेरिका के हितों के खिलाफ बताते हुए इसके सदस्य देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. इस पृष्ठभूमि में पुतिन का बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.


भारत-चीन के बीच बढ़ती नजदीकी


रविवार को तियानजिन में ही प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक घंटे से अधिक समय तक द्विपक्षीय वार्ता हुई. दोनों नेताओं ने पिछले साल रूस के कजान में हुई अपनी मुलाकात का जिक्र किया, जहां से भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई थी. मोदी ने कहा, "कजान में हमारी चर्चा बहुत सकारात्मक थी. सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच शांति और स्थिरता का माहौल बना है. कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी बहाल हो चुकी हैं."


मोदी ने चीन के साथ नजदीकी संबंधों पर जोर देते हुए कहा, "भारत और चीन की एकजुटता में 280 करोड़ लोगों का हित निहित है. यह पूरे विश्व के कल्याण के लिए है. हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर इस रिश्ते को आगे ले जाना चाहते हैं."


शी जिनपिंग ने भी आपसी सहयोग का संदेश देते हुए कहा, "प्रधानमंत्री, आपसे फिर मिलकर अच्छा लग रहा है. एससीओ सम्मेलन के लिए चीन में आपका स्वागत है. विश्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है. भारत और चीन न केवल सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं, बल्कि प्राचीन सभ्यताओं के धारक भी हैं. पड़ोसी के रूप में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना जरूरी है. ड्रैगन और हाथी का एकजुट होना समय की मांग है."


रूस के साथ भारत का ऐतिहासिक रिश्ता


शीत युद्ध के समय से ही रूस (पूर्व सोवियत संघ) भारत का विश्वसनीय मित्र रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका और पश्चिमी देशों ने मॉस्को पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, लेकिन भारत ने संतुलन बनाए रखा. उसने अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखते हुए रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखा. हालांकि, ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद स्थिति बदल गई. रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए उत्सुक ट्रम्प ने रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी. भारत पर रूस से तेल आयात के लिए पहले 25% और फिर अतिरिक्त 25% (कुल 50%) टैरिफ लगाने की घोषणा की गई.


दिलचस्प बात यह है कि चीन, जो रूस से भारत की तुलना में अधिक तेल आयात करता है, पर अभी तक ट्रम्प ने कोई सजा नहीं लगाई है. विश्लेषकों का मानना है कि दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ट्रम्प ने यह 'रणनीति' अपनाई है.


क्या बन रहा है नया त्रिपक्षीय अक्ष?


दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन के 'आक्रामक रवैये' को रोकने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर 'क्वाड' गठबंधन बनाया है. लेकिन ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच रणनीतिक साझेदारी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अमेरिका अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी चीन को टैरिफ में छूट दे रहा है, तो रणनीतिक मित्र भारत को निशाना क्यों बनाया जा रहा है? अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रहे हैं.


चीन ने भी अमेरिका की 'दादागिरी' के खिलाफ आवाज उठाई है. जिनपिंग प्रशासन ने संकेत दिया है कि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति में नई दिल्ली और बीजिंग को एक-दूसरे के करीब आने की जरूरत है. ब्लूमबर्ग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर ट्रम्प की टैरिफ नीति के प्रति आगाह किया था. इसके दो महीने बाद जून से दोनों देशों के रिश्ते और सहज होने लगे. चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत आए, और भारत ने रूस से तेल आयात जारी रखा.


रूस ने भी भारत का समर्थन करते हुए कहा है कि कोई तीसरा देश यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा देश किसके साथ संबंध रखेगा. भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हाल ही में कहा था, "कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता."


नया भू-राजनीतिक समीकरण


भारत, चीन और रूस का यह करीबी रुख न केवल दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, बल्कि वैश्विक राजनीति में एक नए त्रिपक्षीय अक्ष के निर्माण की ओर इशारा कर रहा है. इस बदलाव में ट्रम्प की टैरिफ नीति एक उत्प्रेरक है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP