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ट्रंप सबको अपना उपनिवेश समझते हैं

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08 जुल. 2025, 02:38 AM 5 मिनट में पढ़ें 1

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

नई दिल्ली । डेस्क: ब्रिक्स घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया कि एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपाय विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन करते हैं और वैश्विक व्यापार को बाधित करते हैं. इसके अलावा, एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया गया.


इसके जवाब में ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोाएल प्लेटफॉर्म पर लिखा, "जो भी देश ब्रिक्स की अमरीका विरोधी नीतियों के साथ जुड़ेगा, उस पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जायेगा. इस नीति में कोई छूट नहीं होगी." ट्रंप की यह प्रतिक्रिया घोषणापत्र के उन बिंदुओं को लेकर मानी जा रही है, जिनमें एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों की आलोचना की गई थी, हालांकि घोषणापत्र में अमरीका का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया.

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रियो डी जनेरियो में संपन्न 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी ने वैश्विक चर्चा को तेज कर दिया है. ब्रिक्स, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं, ने अपने हालिया घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों की निंदा की थी. 


ट्रंप ने इसके जवाब में ब्रिक्स की "अमरीका विरोधी नीतियों" का हवाला देते हुये संगठन के देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है. इस धमकी का भारत पर क्या असर होगा, खासकर तब जब भारत और अमरीका के बीच एक मिनी ट्रेड डील की घोषणा होने वाली है? अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 जुलाई से लागू होने वाले टैरिफ़ को अब 1 अगस्त से लागू करने की घोषणा की है.


भारत, ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य होने के नाते, इस संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. लेकिन अमरीका के साथ उसकी प्रस्तावित मिनी ट्रेड डील की स्थिति जटिल हो सकती है. ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह 7 जुलाई, 2025 से कई देशों के साथ ट्रेड डील की घोषणा करेंगे. भारत और अमरीका के बीच मिनी ट्रेड डील की बातचीत अंतिम चरण में है, लेकिन ट्रंप की ब्रिक्स को धमकी ने इस डील पर सवाल उठाये हैं.


दिल्ली स्थित ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव कहते हैं, "ट्रंप को लगता है कि सारे देश उनके उपनिवेश हैं. वह एकतरफा अपनी नीतियां लागू करना चाहते हैं." उनके अनुसार, ट्रंप की धमकी का मुख्य कारण ब्रिक्स देशों द्वारा वैकल्पिक रिजर्व करेंसी की चर्चा है, जो अमरीकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती दे सकती है.


अंतरराष्ट्रीय मामलों की जानकार मंजरी सिंह कहती हैं, "ट्रंप उन संगठनों को अमरीका विरोधी मानते हैं, जिनमें अमरीका शामिल नहीं है, जैसे ब्रिक्स या एससीओ." ब्रिक्स में रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देशों की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बनाती है. रूस ने 2022 में ब्रिक्स के लिए एक नई अंतरराष्ट्रीय रिजर्व करेंसी का प्रस्ताव दिया था, जिसे ट्रंप अमरीका के लिए खतरे के रूप में देखते हैं.


अजय श्रीवास्तव के अनुसार, ब्रिक्स की ताकत का आधार इसकी आर्थिक विविधता है, लेकिन इसका कोई भौगोलिक या राजनीतिक एकीकरण नहीं है. फिर भी, रूस और चीन जैसे देश अपनी मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं, खासकर 2012 में ईरान और 2022 में रूस को स्विफ्ट सिस्टम से बाहर किये जाने के बाद. श्रीवास्तव कहते हैं, "अमरीका ने डॉलर को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, जिसके कारण अन्य देश वैकल्पिक मुद्राओं की ओर बढ़ रहे हैं."


हालांकि, मंजरी सिंह का मानना है कि ब्रिक्स में एक सामान्य मुद्रा बनाना आसान नहीं है. "कॉमन करेंसी बनाना डॉलर को सीधे चुनौती देता है, लेकिन इसके कई नुकसान हैं. यह केवल उन देशों के साथ ही उपयोगी होगी, जिनके साथ व्यापार है," वह कहती हैं. यूरोप के यूरो की तरह, ब्रिक्स में भी सामान्य मुद्रा की राह में कई बाधायें हैं.


ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 26% टैरिफ की घोषणा की थी, लेकिन 9 जुलाई तक सभी टैरिफ पर रोक लगा दी थी, सिवाय 10% टैरिफ के. भारत और अमरीका के बीच मिनी ट्रेड डील की बातचीत चल रही है, लेकिन ट्रंप की धमकी ने अनिश्चितता बढ़ा दी है. अजय श्रीवास्तव कहते हैं, "भारत ने 10% टैरिफ स्वीकार किया है, लेकिन 26% टैरिफ पर अंतिम फैसला बाकी है. भारत कृषि और डेयरी क्षेत्रों में अमरीका की शर्तें मानने को तैयार नहीं है."


अपराजिता कश्यप चेतावनी देती हैं कि यदि ट्रंप ब्रिक्स के कारण भारत पर टैरिफ लगाते हैं, तो भारत के आईटी, फार्मास्युटिकल्स और टेक्सटाइल उद्योगों को नुकसान हो सकता है. वह कहती हैं, "अमरीका का दबाव भारत को ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ जैसे मंचों में फिर से निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकता है, लेकिन चीन के प्रभुत्व से बचना भी एक चुनौती होगी."


ट्रंप की धमकी ने ब्रिक्स देशों, विशेष रूप से भारत, के लिए एक जटिल स्थिति पैदा की है. भारत को अपनी आर्थिक स्वतंत्रता और वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को संतुलित करना होगा. ट्रंप की नीतियां न केवल व्यापार, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती हैं. भारत को सावधानीपूर्वक कदम उठाने होंगे ताकि वह अमरीका के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखे और साथ ही ब्रिक्स जैसे संगठनों में अपनी स्थिति को बनाये रखे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP