ट्रम्प का दावा- ईरानी नेतृत्व में दरार
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व को "गंभीर रूप से विभाजित" करार देते हुए युद्धविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा की है. व्हाइट हाउस से जारी बयान में ट्रम्प ने संकेत दिया कि ईरान की सत्ता के शीर्ष केंद्रों में भारी उथल-पुथल मची हुई है, जिसके कारण बातचीत में देरी हो रही है. ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान एक "एकीकृत प्रस्ताव" के साथ सामने नहीं आता, तब तक हारमुज जलडमरूमध्य और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी सख्ती से लागू रहेगी.
गौरतलब है कि लगभग तीन सप्ताह पहले ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिकी सैन्य अभियान ने ईरान में सत्ता परिवर्तन के अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है और अब वाशिंगटन वहां के "बिल्कुल नए लोगों" के साथ व्यवहार कर रहा है. युद्धविराम की समय सीमा बुधवार को समाप्त हो रही थी, लेकिन अंतिम क्षणों में ट्रम्प ने इसे विस्तार देने का निर्णय लिया ताकि बातचीत के लिए अधिक समय मिल सके.
ईरान में सत्ता के समीकरणों पर नजर डालें तो 28 फरवरी को युद्ध के पहले ही दिन अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद उनके 56 वर्षीय पुत्र मोज्तबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है. हालांकि मोज्तबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि वह हवाई हमलों में घायल हुए थे.
रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वह गंभीर चोटों से उबर रहे हैं और ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें कर रहे हैं. मोज्तबा खामेनेई को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का बेहद करीबी और कट्टरपंथी विचारधारा वाला माना जाता है, जो अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के प्रति कड़ा रुख अपना सकते हैं. उन्होंने हाल ही में एक संदेश में अमेरिकी नौसेना को "नई कड़वी हार" चखाने की चेतावनी भी दी है.
इस बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ सीधे संवाद का नेतृत्व कर रहे हैं. 64 वर्षीय गालिबाफ, जो पूर्व आईआरजीसी कमांडर और तेहरान के मेयर रह चुके हैं, वाशिंगटन की पसंद के तौर पर उभर रहे हैं. हालांकि, गालिबाफ की बातचीत की पहल को ईरान के भीतर ही कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है. कट्टरपंथी तत्वों और 'पायदारी फ्रंट' (Paydari Front) जैसे समूहों ने उन पर "विश्वासघात" का आरोप लगाया है.
इन समूहों का मानना है कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल नुकसानदेह है. गालिबाफ ने इन आलोचनाओं का बचाव करते हुए कहा है कि कूटनीति का अर्थ पीछे हटना नहीं, बल्कि सैन्य लाभ को राजनीतिक परिणामों और स्थायी शांति में बदलना है. उन्होंने ट्रम्प की धमकियों पर पलटवार करते हुए यह भी कहा कि ईरान युद्ध के मैदान में "नए पत्ते" खोलने के लिए तैयार है और धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं की जाएगी.
ईरान की सैन्य संरचना में IRGC और नियमित सेना (अर्टेश) के बीच का अंतर्विरोध भी सतह पर आ गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर के दौरान भी हारमुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाजों पर हुए हमले यह दर्शाते हैं कि कूटनीतिक टीम पर आईआरजीसी का दबदबा है और वह राजनयिक प्रयासों को दरकिनार कर रही है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ईरान के भीतर विभिन्न धड़े अपनी शक्ति प्रदर्शन की कोशिश कर रहे हैं. जहां एक ओर गालिबाफ शांति वार्ता को आगे बढ़ाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर आईआरजीसी और कट्टरपंथी धड़े मसूद पेज़ेशकियन प्रशासन और गालिबाफ को निशाना बना रहे हैं.
अंततः, यदि कोई समझौता होता भी है, तो वह सर्वोच्च नेतृत्व की इच्छा पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल ईरान के सत्ता गलियारों में स्पष्ट विभाजन और अनिश्चितता का माहौल दिखाई दे रहा है.