गाजा युद्ध के 3 साल: क्या अब कमजोर पड़ेगा वैश्विक दबाव?
नई दिल्ली । डेस्क: हमास द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को किए गए हमले को तीन साल पूरे हो चुके हैं, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था. इसके बाद इजराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) द्वारा गाजा में चलाए गए दो साल के भीषण सैन्य अभियान ने पूरे क्षेत्र को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इस तबाही में 74,000 से अधिक फिलिस्तीनी अपनी जान गंवा चुके हैं. एक साल पहले अमेरिकी मध्यस्थता में हुआ संघर्षविराम कागजों तक ही सीमित रहा, जहां बड़े हमले रुकने के बावजूद रुक-रुक कर सैन्य कार्रवाइयां जारी हैं.
शांति समझौते के एक साल और गाजा की अनसुलझी जमीनी हकीकत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 20-सूत्रीय योजना के पहले चरण के तहत जीवित बंधकों की वापसी और हजारों फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई तो संभव हुई, लेकिन पूर्ण शांति का सपना अधूरा ही रहा. संघर्षविराम के एक साल बाद भी गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 1,400 से ज्यादा नागरिक जान गंवा चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती ठप है, हमास ने हथियार डालने से इनकार कर दिया है और इजराइल बिना पूर्ण निशस्त्रीकरण के पुनर्निर्माण की अनुमति देने को तैयार नहीं है. गाजा के पुनरुद्धार के लिए घोषित अरबों डॉलर का पैकेज इस राजनीतिक गतिरोध के कारण जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाने में विफल साबित हो रहा है.
वैश्विक ध्यान में गिरावट और नए संकटों का उभार
समय के साथ गाजा के मानवीय संकट पर वैश्विक बिरादरी का ध्यान कम हुआ है. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच इस साल शुरू हुए नए सैन्य संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दुनिया भर की प्राथमिकताओं को बदल दिया है. इसके अतिरिक्त, वैश्विक ईंधन संकट और घरेलू आर्थिक चुनौतियों ने आम जनता का ध्यान गाजा की स्थिति से हटा दिया है. हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वैश्विक नीति निर्माताओं के बीच यह मुद्दा अब भी प्रासंगिक बना हुआ है, लेकिन अब वह जन-आक्रोश देखने को नहीं मिल रहा जो युद्ध के शुरुआती दौर में था.
वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक रुख
गाजा में घटती सैन्य तीव्रता के बीच वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियों के बसने और बसने वालों की हिंसा एक नई चुनौती बनकर उभरी है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े दर्शाते हैं कि वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसक घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. इसके जवाब में ब्रिटेन और कुछ यूरोपीय देशों ने इन अवैध बस्तियों से व्यापार पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए हैं. यद्यपि ये आर्थिक प्रतिबंध सांकेतिक अधिक हैं, लेकिन वे इजराइल पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक दबाव का स्पष्ट संकेत देते हैं.
27 अक्टूबर का चुनाव और इजराइल की भावी दिशा
इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आगामी संसदीय चुनाव पूरे मध्य पूर्व की राजनीति को नया मोड़ दे सकते हैं. पोल संकेत देते हैं कि गादी एसेनकोट की 'याशर' पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभर सकती है. यदि वर्तमान कट्टरपंथी सरकार की जगह कोई अपेक्षाकृत मध्यमार्गी गठबंधन सत्ता में आता है, तो वेस्ट बैंक में हिंसा रोकने और गाजा में पुनर्निर्माण सहायता को गति मिलने की उम्मीद जगेगी. हालांकि, इजराइली जनता में 7 अक्टूबर के हमले के बाद सुरक्षा को लेकर बना गहरा भय किसी भी नई सरकार को फिलिस्तीनी राष्ट्रवाद की ओर बड़े कदम उठाने से रोक सकता है.
आगे की राह: शांत दौर में भी जवाबदेही की दरकार
इतिहास गवाह है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव अत्यधिक हिंसा के दौर में सबसे तीव्र होता है और स्थितियां थोड़ी सामान्य होते ही सुस्त पड़ जाता है. यदि इजराइल में अधिक संयमित सरकार बनती है, तो दुनिया का ध्यान इस मुद्दे से पूरी तरह हटने का खतरा बढ़ जाएगा. तीन साल बाद भी गाजा में पूर्ण शांति की बहाली इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक समुदाय केवल संकट के चरम पर ही नहीं, बल्कि शांति प्रक्रिया के धीमे और जटिल दौर में भी अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखता है या नहीं.