होर्मुज समस्या का एक मात्र समाधान युद्ध का अंत है- महासचिव IMO
नई दिल्ली । डेस्क: अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव आर्सेनिओ डोमिंगुएज़ ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए मौजूदा गतिरोध और शिपिंग संकट का एकमात्र वास्तविक समाधान चल रहे युद्ध का अंत है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष शुरू होने से पहले इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों के गुजरने में कभी कोई समस्या नहीं आई थी, इसलिए शांति बहाली ही सामान्य स्थिति की ओर लौटने का एकमात्र रास्ता है.
डोमिंगुएज़ ने उन सुझावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें इस जलडमरूमध्य के प्रबंधन के लिए किसी नए अंतरराष्ट्रीय समझौते या ढांचे की आवश्यकता बताई जा रही है. उनका मानना है कि ईरान और ओमान के बीच 1968 का मौजूदा यातायात पृथक्करण समझौता दशकों से सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है और युद्ध समाप्त होते ही इसी व्यवस्था के तहत दोबारा परिचालन शुरू किया जा सकता है.
उनके अनुसार, वर्तमान संकट कोई तकनीकी या प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से युद्धजन्य स्थिति है, जिसे केवल कूटनीति और शांति से ही सुलझाया जा सकता है.
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या शुल्क लगाने की मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए महासचिव ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया. उन्होंने वैश्विक समुदाय को आगाह किया कि समुद्र के इन स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय गलियारों पर किसी भी प्रकार का टैक्स वसूलना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा, जो वैश्विक व्यापार की नींव को हिला सकता है.
डोमिंगुएज़ ने दोटूक शब्दों में कहा कि किसी भी देश के पास इन जलडमरूमध्यों पर भुगतान थोपने का कानूनी अधिकार नहीं है और उन्होंने सभी शिपिंग कंपनियों से अपील की कि वे ईरान की ऐसी किसी भी अवैध मांग को स्वीकार न करें.
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच भुगतान संग्रह के लिए एक 'संयुक्त उद्यम' की संभावना का संकेत दिया है, लेकिन आईएमओ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून ऐसे किसी भी शुल्क की अनुमति नहीं देते हैं, चाहे वह किसी भी समझौते के तहत क्यों न हो.
महासचिव ने अपनी गहरी चिंता उन 20,000 निर्दोष नाविकों के प्रति व्यक्त की जो इस प्रभावी नाकेबंदी के कारण खाड़ी के पानी में फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा कि उनका प्राथमिक ध्यान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर से कहीं अधिक उन लोगों की सुरक्षा और कल्याण पर है जो इस संघर्ष का हिस्सा न होते हुए भी इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं.
वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, जिससे वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है.
आंकड़ों के अनुसार, युद्ध से पहले जहां इस मार्ग से रोजाना करीब 135 जहाज गुजरते थे, वहीं हालिया संघर्षविराम के दौरान यह संख्या घटकर नगण्य रह गई है.
अमेरिकी सेना द्वारा जलमार्ग से बारूदी सुरंगें हटाने के दावों और ईरान द्वारा उनके खंडन के बीच, डोमिंगुएज़ ने दोहराया कि जब तक युद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं होता, तब तक समुद्री परिवहन में सुरक्षा और स्थिरता की बहाली संभव नहीं है. उन्होंने क्षेत्रीय देशों से अपील की कि वे अपने साझा लाभ के लिए तनाव कम करने की दिशा में काम करें ताकि यह जलमार्ग फिर से दुनिया के लिए सुरक्षित बन सके.