हॉर्मुज में तनाव से भारत में यूरिया उत्पादन आधा हुआ
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली एलएनजी (LNG) आपूर्ति ठप हो गई है, जिसका सीधा असर भारत के उर्वरक क्षेत्र पर पड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, देश के प्रमुख यूरिया संयंत्र वर्तमान में अपनी क्षमता से आधे पर चल रहे हैं, जिससे आगामी खरीफ सीजन में धान और गेहूं की बुआई के लिए खाद की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
भारत की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने 'फोर्स मेज्योर' घोषित कर दिया है, क्योंकि ऊपर की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से कतर की रास लाफन जैसी कंपनियां अनुबंधित मात्रा देने में असमर्थ हैं.
इसके चलते गेल (GAIL), आईओसी (IOC) और बीपीसीएल (BPCL) जैसे वितरकों ने उर्वरक इकाइयों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में 35-40 प्रतिशत की कटौती कर दी है.
संयंत्र अधिकारियों का कहना है कि बड़े अमोनिया-यूरिया प्लांट कम क्षमता पर चलने के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं, जिसके कारण उनकी तापीय दक्षता गिर गई है और ऊर्जा की खपत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है.
परिचालन संबंधी चुनौतियों के साथ-साथ अब उर्वरक कंपनियों के सामने वित्तीय अनिश्चितता भी खड़ी हो गई है. गेल ने सूचित किया है कि 1 मार्च, 2026 से गैस की कीमतों का निर्धारण कई अलग-अलग मानदंडों पर होगा, जो अभी अंतरिम हैं.
हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार 19 मार्च तक भारत के पास 61.14 लाख टन यूरिया का स्टॉक है, जो पिछले साल की तुलना में अधिक है, लेकिन यदि उत्पादन में यह गिरावट जारी रही तो आगामी महीनों में स्थिति गंभीर हो सकती है.