तेहरान की चेतावनी- हमला हुआ तो इज़रायल और US ठिकाने होंगे निशाने पर
बीजिंग । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उस पर सैन्य हमला किया, तो उसका जवाब इज़रायल और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधे हमलों के रूप में दिया जाएगा. यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर ब्रीफ किया गया है.
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप को हाल के दिनों में ईरान पर सैन्य हमलों के नए विकल्पों की जानकारी दी गई है. हालांकि अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के मुद्दे पर सैन्य कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. इनमें तेहरान के कुछ गैर-सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने जैसे विकल्प भी शामिल बताए गए हैं.
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने संसद में कहा कि अमेरिका द्वारा किसी भी तरह का हमला “बिना जवाब के नहीं रहेगा”. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में इज़रायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे ईरान के लिए “वैध लक्ष्य” होंगे. ईरान की इस चेतावनी से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है.
इस बीच, ईरान के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख अहमद-रेज़ा रदान ने दावा किया है कि देश में पिछले दो हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कई प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये प्रदर्शन आर्थिक संकट, मुद्रा रियाल के तेज़ अवमूल्यन और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानियों को लेकर हो रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका “ईरान की मदद के लिए तैयार है” और पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि वहां लोगों की हत्या होती है तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसका मतलब ज़मीनी सेना भेजना नहीं, बल्कि “जहां सबसे ज्यादा असर हो, वहां कड़ा प्रहार” करना होगा.
तनाव के बीच इज़रायल भी सतर्क हो गया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की किसी संभावित कार्रवाई को लेकर इज़रायल हाई अलर्ट पर है. इसी कड़ी में इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत भी हुई है.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई ने प्रदर्शनों को लेकर देशवासियों से एकता बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारी अमेरिका को खुश करने के लिए देश में अशांति फैला रहे हैं. साथ ही उन्होंने अमेरिका को अपनी आंतरिक समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह दी.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमला किया तो इसका असर पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तनाव और संघर्ष के रूप में सामने आ सकता है. चीन के एक रणनीतिक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि ऐसी कार्रवाई से अमेरिका को कोई ठोस रणनीतिक लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि ईरान-इज़रायल टकराव और गहराने का खतरा बढ़ जाएगा.
कुल मिलाकर, ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर अस्थिरता के कगार पर ला खड़ा किया है, जहां किसी भी चूक के गंभीर अंतर्राष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं.