अमेरिका को पछाड़कर चीन बना भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर
नई दिल्ली । डेस्क: भारत सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत का चीन को होने वाला निर्यात 27 प्रतिशत बढ़कर 1.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल अप्रैल 2025 में 1.39 अरब डॉलर था. वहीं दूसरी ओर, चीन से होने वाले आयात में भी 20.85 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
अप्रैल 2026 में चीन से आयात बढ़कर 11.97 अरब डॉलर हो गया, जिसके चलते व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) बढ़कर 10.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार का दर्जा हासिल कर लिया है. इस अवधि के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है.
इससे पहले साल 2024-25 तक लगातार चार वर्षों से अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ था.
अप्रैल महीने के दौरान अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में 1.14 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई और यह 8.47 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से होने वाले आयात में 4.67 प्रतिशत की गिरावट आई है.
चीन और अमेरिका के अलावा, सिंगापुर, तंजानिया, हांगकांग, मलेशिया, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश जैसे देशों को होने वाले मर्चेंडाइज निर्यात में भारी उछाल आया है.
इसकी बदौलत अप्रैल में भारत की निर्यात वृद्धि दर 5 महीने के उच्चतम स्तर (13.48 प्रतिशत) पर पहुंच गई.
अप्रैल में सिंगापुर को निर्यात 179.18 प्रतिशत बढ़कर 3.19 अरब डॉलर और तंजानिया को निर्यात 157.63 प्रतिशत बढ़कर 1.29 अरब डॉलर रहा. हालांकि, पिछले वित्त वर्ष में नीदरलैंड और फ्रांस जैसे देशों को होने वाले निर्यात में गिरावट दर्ज की गई.
आयात के मोर्चे पर रूस, जापान, कोरिया, जर्मनी और स्विट्जरलैंड के साथ-साथ ओमान और पेरू से होने वाले आयात में जबरदस्त तेजी आई है. ओमान से आयात 246.42 प्रतिशत और पेरू से 315.56 प्रतिशत बढ़ा है. इसके अतिरिक्त ताइवान, ब्राजील और नाइजीरिया से भारत आने वाले शिपमेंट में भी 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.