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SC वकीलों को समन भेजने पर सख्त

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10 जुल. 2025, 03:48 AM 2 मिनट में पढ़ें 3

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को समन भेजने की प्रथा पर स्वत: संज्ञान लिया है. जो अपने मुवक्किलों को कानूनी सलाह देते हैं या जांच के दौरान उनका प्रतिनिधित्व करते हैं. इस मामले को 'वकीलों को समन और संबंधित मुद्दे' शीर्षक के तहत दर्ज किया गया है. 


यह सुनवाई 14 जुलाई को होगी, जब सुप्रीम कोर्ट सात सप्ताह की ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद फिर से खुलेगा. इसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी, जिसमें न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और एनवी अंजरिया शामिल होंगे.

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यह कदम कानूनी पेशे की स्वतंत्रता को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वरिष्ठ वकील अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को समन जारी किया था. 


यह समन केयर हेल्थ इंश्योरेंस द्वारा रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की पूर्व चेयरपर्सन रश्मि सलूजा को 22.7 मिलियन से अधिक कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजनाओं (ईएसओपी) देने की जांच से जुड़ा था, जिसकी कीमत 250 करोड़ रुपये से अधिक थी. दातार ने इस ईएसओपी के पक्ष में कानूनी राय दी थी, जबकि वेणुगोपाल इस मामले में एडव्होकेट ऑन रिकॉर्ड थे.


ईडी के इस कदम की देशभर के कई बार एसोसिएशनों ने तीखी आलोचना की और इसे वकीलों को उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में डराने-धमकाने की कोशिश बताया. 


इस विवाद के बाद ईडी ने समन वापस ले लिया और अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को आयकर अधिनियम की धारा 132 का उल्लंघन करते हुए वकीलों को समन न भेजने का आंतरिक निर्देश जारी किया. ईडी ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशक से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा.


सुप्रीम कोर्ट का यह स्वत: संज्ञान लेना इस बात की ओर इशारा करता है कि ऐसी कार्रवाइयों से कानूनी प्रतिनिधित्व पर ठंडा प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर न्याय तक पहुँच और मुवक्किल की गोपनीयता जैसे व्यापक सिद्धांतों पर पड़ सकता है. 


यह मामला कानूनी बिरादरी और जांच एजेंसियों के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP