दिल्ली प्रदूषण पर SC सख्त: 9 टोल प्लाजा हटाने या बंद करने का निर्देश
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में खतरनाक स्तर पर पहुँच चुके वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है. प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर असंतोष जताते हुए शीर्ष अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि सरकार द्वारा किए गए उपाय "पूरी तरह विफल" रहे हैं.
जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए केवल तात्कालिक सुधारों से काम नहीं चलेगा. अदालत ने कहा, "प्रदूषण को रोकने के लिए केवल अस्थायी कदम उठाने के बजाय एक ठोस और दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है."
दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक और उससे होने वाले धुएं को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा निर्देश दिया है. अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को आदेश दिया कि वे यातायात सुचारू करने और प्रदूषण घटाने के लिए दिल्ली की सीमाओं पर स्थित 9 टोल प्लाजा को या तो अस्थायी रूप से बंद करें या उन्हें वहां से हटा दें.
शिकायत की गई थी कि इन टोल प्लाजा के कारण गाड़ियों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम होता है, बल्कि वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं दिल्ली की हवा को और भी प्रदूषित कर रहा है.
प्रदूषण के चलते दिल्ली सरकार द्वारा नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों को बंद करने के फैसले पर भी कोर्ट में चर्चा हुई. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.
अदालत ने कहा कि चूंकि पहले से ही शीतकालीन अवकाश का समय नजदीक है, इसलिए स्कूलों के बंद होने को छुट्टियों के विस्तार के रूप में देखा जा सकता है. अदालत ने इसे एक 'अस्थायी कदम' करार दिया.
मुख्य बिंदु
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: प्रदूषण नियंत्रण में सरकारी तंत्र पूरी तरह नाकाम.
नया निर्देश: ट्रैफिक और धुएं को कम करने के लिए 9 टोल प्लाजा को हटाने या बंद करने का आदेश.
कोर्ट का रुख: केवल तात्कालिक उपायों के बजाय लॉन्ग-टर्म प्लानिंग पर जोर.