NALSAR मामले में BCI को SC की फटकार, CJI बोले- विरोध प्रदर्शन में दखल न दें
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल तेलंगाना की नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के नामांकन को रोकने वाले बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है. हालांकि BCI चेयरमैन ने इस विवादास्पद निर्देश को वापस ले लिया था, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्रों और फैकल्टी को राहत प्रदान की है.
कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि BCI या कोई अन्य निकाय छात्रों या शिक्षकों के खिलाफ इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा.
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया और BCI के हस्तक्षेप को गैर-जरूरी बताया.
CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, "BCI अनावश्यक रूप से कार्रवाई कर रही है. यदि छात्रों के पास विरोध करने का कोई कारण है, तो उन्हें विरोध करने का अधिकार है. छात्रों ने मुझे पत्र लिखा होगा. यह छात्रों और मेरे बीच का संवाद है. वे (BCI) अनावश्यक रूप से मुद्दा उठाने वाले कौन होते हैं? यह पूरी तरह से अनुचित है. BCI का इससे कोई लेना-देना नहीं है."
छात्र जीवन के अपने अनुभवों को साझा करते हुए CJI ने कहा, "मैं खुद अपने छात्र जीवन के दौरान छात्र गतिविधियों में शामिल था. वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं, उन्हें इसकी अनुमति दी जानी चाहिए. भले ही वे गलत हों, मान भी लिया जाए, फिर भी उन्हें विरोध करने का अधिकार है. उन्हें कौन रोक सकता है? जब तक वे कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं, उन्हें सुना जाना चाहिए. बार काउंसिल या किसी अन्य निकाय को इसमें हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए?"
उन्होंने आगे कहा, "अगर कोई अपनी युवावस्था के दौरान कोई गलत बयान भी देता है, तो उसे गलत ही रहने दें, लेकिन उस पर कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों होनी चाहिए?"
वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने अदालत में यह याचिका पेश करते हुए BCI चेयरमैन के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए. उन्होंने अदालत को बताया कि इस निर्णय के लिए बार काउंसिल की कोई बैठक नहीं बुलाई गई थी और केरल के एक BCI सदस्य ने भी इस कदम का विरोध किया है.
वहीं, BCI की ओर से पेश वकील राधिका गौतम ने बताया कि फैसले को वापस ले लिया गया है. इस पर पीठ में शामिल जस्टिस जोयमाल्या बागची ने सवाल किया कि क्या ऐसा प्रस्ताव पारित करने के लिए BCI की बैठक बुलाई गई थी?
अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए interim order जारी किया और BCI को किसी भी कार्रवाई से रोक दिया.
आदेश सुनाने के बाद CJI सूर्यकांत ने नालसार के छात्रों का सुप्रीम कोर्ट बार में स्वागत करते हुए कहा, "आप छात्रों से कहें कि वे जल्द से जल्द अपना लाइसेंस प्राप्त करें. सुप्रीम कोर्ट बार में शामिल हों. हम उन्हें कानूनी सहायता (लीगल एड) मामलों के लिए एम्पैनल करेंगे और उन्हें लीगल एड का काम करने देंगे. उनके करियर में बाधा उत्पन्न करने वालों को यही सबसे उपयुक्त जवाब होगा."