IIT कानपुर में छात्र सुसाइड: 2 साल में 9 मौतें, देश की IITs में 65 मौंते
मुंबई । डेस्क: आईआईटी कानपुर में मंगलवार को एक छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने एक बार फिर देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गहराते मानसिक स्वास्थ्य संकट को उजागर कर दिया है. 'ग्लोबल आईआईटी एलुमनी सपोर्ट ग्रुप' के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न आईआईटी परिसरों में कम से कम 65 छात्रों ने अपनी जान दी है. चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 30 मौतें पिछले दो वर्षों में ही हुई हैं.
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले दो सालों में हुई कुल आत्महत्याओं में से 30% अकेले आईआईटी कानपुर में हुई हैं, जहाँ 9 छात्रों ने दम तोड़ा. इस सूची में आईआईटी खड़गपुर 7 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि अधिक छात्र संख्या होने के बावजूद आईआईटी बॉम्बे में इस दौरान केवल 1 ऐसी घटना दर्ज की गई.
संस्थानों द्वारा अक्सर इन मौतों को 'व्यक्तिगत' या 'अकादमिक' तनाव बताकर कमतर आंका जाता है, लेकिन छात्र संगठनों और पूर्व छात्रों का मानना है कि इसके पीछे 'निरंतर मूल्यांकन', तीव्र प्रतिस्पर्धा, अलगाव और कभी-कभी जाति या भाषा आधारित भेदभाव जैसे जटिल कारण छिपे होते हैं.
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सीधे शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने मानसिक स्वास्थ्य को अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' का अभिन्न अंग माना है.
सिंह ने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया है कि आईआईटी कानपुर में बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य हालातों के लिए निदेशक को जिम्मेदार ठहराया जाए और नेतृत्व में बदलाव पर विचार किया जाए ताकि संस्थानों में एक सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण सुनिश्चित हो सके.