चांद से टकराने जा रहा है स्पेसएक्स का बेकाबू रॉकेट
नई दिल्ली । डेस्क: आगामी 5 अगस्त की सुबह (अमेरिकी समय अनुसार) चांद की सतह पर एक बड़ा धमाका होने जा रहा है. एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का एक बेकार हो चुका रॉकेट लगभग 8,700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद के धरातल से टकराएगा. इस जोरदार टक्कर के कारण चंद्रमा की सतह पर 20 से 30 मीटर गहरा एक विशाल गड्ढा (क्रेटर) बन सकता है.
हालांकि इस घटना से पृथ्वी या चंद्रमा को सीधे तौर पर कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन इसने इंसान द्वारा अंतरिक्ष में फैलाए जा रहे कचरे (स्पेस डैब्रिस) और इसके गंभीर नतीजों पर एक नई वैश्विक बहस को जन्म दे दिया है.
यह रॉकेट जनवरी 2025 में दो व्यावसायिक लूनर लैंडर को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए लॉन्च किया गया था. अपना मिशन पूरा करने के बाद रॉकेट के पास पृथ्वी पर वापस लौटने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं बचा था. इसके बाद यह अपनी कक्षा बदलता हुआ धीरे-धीरे चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आ गया और अब वहां क्रैश होने जा रहा है.
वैज्ञानिकों के लिए यह एक दुर्लभ अवसर है, क्योंकि वे पहली बार यह अध्ययन कर पाएंगे कि इस तरह की टक्कर के बाद चंद्रमा की धूल (रेगोलिथ) कैसे उड़ती है और वहां गड्ढे कैसे बनते हैं. चंद्रमा पर पृथ्वी की तरह वायुमंडल और हवा न होने के कारण वहां के सतह पर पड़े निशान कभी मिटते नहीं हैं, जैसे कि 50 साल पहले गए अपोलो मिशन के पदचिह्न आज भी वैसे ही मौजूद हैं.
वैज्ञानिकों का एक वर्ग इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि इस टक्कर से उड़ने वाली धूल चंद्रमा पर मौजूद ऐतिहासिक निशानों, जैसे इंसान के पहले कदम के निशान को हमेशा के लिए मिटा सकती है. इसके अलावा, चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहे कृत्रिम उपग्रहों (सैटेलाइट्स) को भी नुकसान पहुंच सकता है.
भविष्य में चंद्रमा पर मानव बस्ती बसाने और खनिज अनुसंधान की योजनाओं पर काम कर रही व्यावसायिक कंपनियों के अभियानों पर भी इस उड़ती धूल का बुरा असर पड़ सकता है.
1967 की 'आउटर स्पेस ट्रीटी' के तहत कोई भी देश चंद्रमा पर अपना दावा नहीं ठोक सकता, लेकिन इस संधि में चंद्रमा के पर्यावरण की रक्षा को लेकर कोई सख्त नियम नहीं बनाए गए हैं.
कानूनन, किसी निजी कंपनी की इस चूक की जिम्मेदारी अमेरिका पर आती है. अगर इसी तरह अंतरिक्ष में कचरा बढ़ता रहा, तो भविष्य के अंतरिक्ष यानों और सैटेलाइट्स से इनके टकराने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा. यही वजह है कि अब दुनिया भर के विशेषज्ञ अंतरिक्ष कचरे के सुरक्षित और सुनियोजित निपटान के लिए सख्त अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने की मांग कर रहे हैं.