सोनम वांगचुक ने 'बलि का बकरा' बनाने का आरोप लगाया
लद्दाख । डेस्क: लद्दाख क्षेत्र में हाल की हिंसक घटनाओं के बीच प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी सरकार के लिए उनकी स्वतंत्रता से कहीं अधिक समस्याएं खड़ी कर सकती है. मंत्रालय ने बुधवार को हुई भीड़ हिंसा का जिम्मेदार वांगचुक को ठहराया था, जिसे उन्होंने "बलि का बकरा बनाने की चालाकी भरी रणनीति" करार दिया.
एक बयान में वांगचुक ने कहा, "मैं देख रहा हूं कि वे मेरे खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मामला गढ़ रहे हैं ताकि मुझे दो साल के लिए जेल भेज सकें. मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन जेल में बंद सोनम वांगचुक उनसे ज्यादा मुश्किलें पैदा करेगा जितना खुला सोनम वांगचुक."
उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा का दोष उन पर या कांग्रेस पर मढ़ना समस्या के मूल को नजरअंदाज करना है. "वे चतुर हो सकते हैं किसी को बलि का बकरा बनाने में, लेकिन बुद्धिमान नहीं. अभी हमें चतुराई नहीं, बुद्धिमत्ता चाहिए क्योंकि युवा पहले से ही बेहद निराश हैं."
वांगचुक ने हिंसा की जड़ को क्षेत्र के युवाओं में छह वर्षों से जमा बेरोजगारी और हर स्तर पर अधर में लटकी प्रतिज्ञाओं की हताशा बताया. उन्होंने सरकार पर आंशिक नौकरी आरक्षण को सफलता बताकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया.
"मुख्य मांगें जैसे लद्दाख को राज्य का दर्जा देना और नाजुक पर्यावरण व आदिवासी हितों की रक्षा के लिए छठी अनुसूची का विस्तार ये पांच साल की शांतिपूर्ण अपीलों के बावजूद अनसुलझी हैं." बलि का बकरा रणनीति से सरकार शांति नहीं ला रही, बल्कि स्थिति को और भड़का रही है, जो मूल मुद्दों से ध्यान हटाती है.
बुधवार को लेह में वांगचुक के नेतृत्व वाले राज्यहुड आंदोलन ने हिंसक रूप धारण कर लिया. चार लोग मारे गए, 80 से अधिक घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी शामिल. 1989 के बाद का यह सबसे बुरा दिन था.
युवाओं ने बीजेपी मुख्यालय, हिल काउंसिल पर हमला किया, वाहनों को आग लगा दी. पुलिस ने आंसू गैस का सहारा लिया. सूर्यास्त तक स्थिति नियंत्रित हुई, लेकिन वांगचुक ने 15 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त कर दी. लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया.
गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया कि हिंसा वांगचुक के "उत्तेजक बयानों" और "राजनीतिक रूप से प्रेरित" लोगों की साजिश थी. लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ बातचीत जारी है.
हाई पावर्ड कमिटी (एचपीसी) की बैठकें हो चुकी हैं, अगली 6 अक्टूबर को. 25-26 सितंबर को भी लद्दाख नेताओं से चर्चा निर्धारित. मंत्रालय ने पुराने वीडियो सर्कुलेट न करने की अपील की.
लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने इसे "साजिश" बताया. "लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन यह स्वतःस्फूर्त नहीं था. दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. कर्फ्यू हताहत रोकने के लिए है."
यह घटना लद्दाख की गहरी समस्याओं को उजागर करती है रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और राजनीतिक अधिकार. यदि मूल मांगें अनदेखी रहीं, तो तनाव बढ़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद ही समाधान है, न कि दमन.