बांग्लादेशी बताकर बाहर भेजी गई सोनाली ने दिया बेटे को जन्म
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल के बीरभूम की रहने वाली सोनाली खातून, जिन्हें बांग्लादेशी घुसपैठिया बताकर जबरन सीमा पार भेज दिया गया था, ने अब भारत में ही एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया है. पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज में सोमवार को बेटे के जन्म की जानकारी खुद तृणमूल कांग्रेस के सर्वभारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया के ज़रिये दी. उन्होंने इसे “मानवता की जीत” बताया और कहा कि मंगलवार को बीरभूम दौरे के दौरान वे स्वयं अस्पताल जाकर सोनाली और नवजात शिशु से मुलाकात करेंगे.
सोशल मीडिया पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने लिखा कि सोनाली खातून के साथ जो अन्याय हुआ था, उसकी पृष्ठभूमि में यह खुशी और भी बड़ी है. उन्होंने आरोप लगाया कि सोनाली को बांग्लादेशी बताकर ज़बरन उस देश में भेज दिया था, जबकि वह भारतीय नागरिक थीं और उस समय गर्भवती भी थीं.
अभिषेक ने अपने संदेश में कहा, “यह मानवता की जीत है. बीरभूम दौरे के समय मैं व्यक्तिगत रूप से अस्पताल जाकर सोनाली और उसके नवजात शिशु को शुभकामनाएं दूंगा. मेरी प्रार्थनाएं उसके परिवार के साथ हैं.”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले दिसंबर में सोनाली का कालीघाट आने का कार्यक्रम था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह यात्रा रद्द कर दी गई थी. तब अभिषेक ने ही अनुरोध किया था कि गर्भावस्था के दौरान इतनी लंबी यात्रा करना ठीक नहीं होगा और सभी चिकित्सा व आवश्यक सहायता का भरोसा दिया था.
गौरतलब है कि सोनाली खातून बीरभूम के पाइकर इलाके की निवासी हैं. काम की तलाश में वह अपने परिवार के साथ दिल्ली गई थीं. आरोप है कि उनके पास भारतीय नागरिकता के वैध दस्तावेज़ होने के बावजूद, केवल बांग्ला भाषा में बात करने के कारण 17 जून को दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.
इसके बाद 26 जून को असम के भारत–बांग्लादेश सीमा से छह लोगों को ‘पुशबैक’ कर बांग्लादेश भेज दिया गया. उस समय सोनाली गर्भवती थीं.
बांग्लादेश पहुंचने के बाद चांपाई नवाबगंज पुलिस ने उन्हें अवैध घुसपैठिया बताकर गिरफ्तार किया और मामला दर्ज किया. इस वजह से सोनाली और उनके परिवार को 100 दिनों से अधिक समय तक वहां की जेल में बंद रहना पड़ा.
करीब एक महीने पहले वे भारत लौट पाईं और अब बेटे के जन्म के बाद इस पूरे मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और मानवीय बहस को तेज कर दिया है.