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ट्रम्प प्रशासन के नए आयात शुल्कों पर तीखी प्रतिक्रिया

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24 जुल. 2026, 05:48 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

Donald Trump
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नई दिल्ली । डेस्क: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दुनिया के 80 से अधिक देशों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने के फैसले के बाद वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर भारी हलचल मच गई है. वॉशिंगटन ने शुक्रवार से प्रभाव में आए इस फैसले के तहत 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक के नए शुल्क लगाए हैं. 


अमेरिकी प्रशासन ने इस कदम का बचाव 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 (Section 301) के तहत करते हुए तर्क दिया है कि संबंधित देश बंधुआ या जबरन श्रम (Forced Labour) से बने सामान की रोकथाम करने में नाकाम रहे हैं. ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि इन टैरिफ से अमेरिकी विनिर्माण को गति मिलेगी और व्यापारिक असंतुलन खत्म होगा. 

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हालांकि, उनके पिछले कई फैसलों को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक ठहराए जाने के बाद, शुक्रवार को लागू हुए इन नए शुल्कों पर भी अमरीका के अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और व्यापारिक साझेदारों ने कड़ा ऐतराज जताया है. वैश्विक स्तर पर मिली इस प्रतिक्रिया में दुनिया के विभिन्न देशों ने क्या कहा, आइए समझते हैं:  


भारत: कपड़ा और परिधान उद्योग में गहराती चिंताएं-


अमेरिकी फैसले से भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल (कपड़ा और वस्त्र) निर्यातकों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है. भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (CITI) के चेयरमैन अश्विन चंद्रन के अनुसार, भारत को उन देशों की विशेष सूची में शामिल नहीं किया गया है जिन्हें अमेरिकी कपास से बने उत्पादों पर छूट दी गई है. 


इस तरह के भेदभावपूर्ण फैसलों से भारतीय कपड़ा उद्योग को मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर अन्य देशों में शिफ्ट होने का बड़ा जोखिम बन गया है, जिससे भारतीय निर्यात को नुकसान पहुंच सकता है.


ऑस्ट्रेलिया: आरोपों को सिरे से किया खारिज-


ऑस्ट्रेलियाई व्यापार मंत्री डॉन फारेल ने अपने देश को बंधुआ मजदूरी से जोड़ने वाली अमेरिकी दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. बीफ, सोना और तांबे के प्रमुख निर्यातकों में शामिल ऑस्ट्रेलिया के रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने एडिलेड में कहा कि ऑस्ट्रेलिया आधुनिक गुलामी और बंधुआ श्रम जैसी बुराइयों को रोकने के लिए दुनिया के सबसे गंभीर देशों में से एक है. 


ऑस्ट्रेलिया इस अनुचित शुल्क को हटाने के लिए अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी रखेगा.


न्यूजीलैंड: बिना साक्ष्यों के लिया गया निराशाजनक फैसला-


न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले को बेहद निराशाजनक बताया है. सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी जांच दल जबरन श्रम से जुड़े दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस या सार्थक सबूत पेश करने में विफल रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि द्विपक्षीय व्यापार में इस प्रकार के बिना आधार वाले शुल्कों पर पुनर्विचार किया जाएगा.


ब्रिटेन: निर्यात पर प्रभाव न पड़ने का दावा-


ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने नया टैरिफ लागू होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे ब्रिटेन के निर्यात पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. अमेरिका के साथ हुए पिछले व्यापारिक समझौतों के तहत ब्रिटेन के कई प्रमुख उद्योगों को अतिरिक्त टैरिफ से पहले ही छूट मिली हुई है. 


यूके सरकार का कहना है कि वे अपनी आपूर्ति श्रृंखला में बंधुआ श्रम के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हैं और अमेरिका ने भी उनके इन प्रयासों को स्वीकार किया है, जिसके चलते उन पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.


जापान: अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन का हवाला-


जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी शुल्कों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. उन्होंने कहा कि जापानी उद्योग और व्यापार हमेशा अंतरराष्ट्रीय मानकों और मानदंडों के अनुसार काम करते हैं. ऐसे में यह बेहद खेदजनक है कि जापान पर बंधुआ श्रम रोकने की व्यवस्था न होने का आरोप लगाकर शुल्क ठोंका गया है. 


हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने आश्वासन दिया है कि कुल टैरिफ दर दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार 15 प्रतिशत की सीमा को पार नहीं करेगी.


यूरोपीय संघ: सतर्कता के साथ राहत की सांस-


यूरोपीय आयोग ने इस घोषणा पर संतुलित और सतर्क प्रतिक्रिया दी है. आयोग के अनुसार, यह नया फैसला पूर्व में अमेरिका और ईयू के बीच हुए व्यापारिक समझौतों की सीमाओं के भीतर ही प्रतीत होता है. प्रवक्ता ने कहा कि यूरोपीय संघ इस बात को सकारात्मक रूप से देखता है कि यह कदम ईयू-यूएस संयुक्त वक्तव्य के तहत तय की गई अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है, इसलिए इससे व्यापार संतुलन प्रभावित होने की आशंका कम है.


चीन: टैरिफ वार किसी के हित में नहीं-


चीन के विदेश मंत्रालय ने 12.5 प्रतिशत के नए शुल्क की तीखी निंदा की है और एकतरफा टैरिफ थोपने की अमेरिकी नीति को खारिज किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि टैरिफ युद्ध या व्यापार युद्ध से किसी भी देश का भला नहीं होने वाला है. 


यह बयान ऐसे समय आया है जब मई में बीजिंग में हुई सकारात्मक चर्चाओं के बाद सितंबर में ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक और उच्च स्तरीय बैठक प्रस्तावित है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP