सरकार का प्राथमिक कर्तव्य नागरिक की जान बचाना- HC
नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है. अदालत ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि हर नागरिक की जान बेहद कीमती है, इसलिए सरकारी डॉक्टरों की टीम द्वारा सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी की जाए.
कोर्ट ने साफ किया कि जब भी जरूरत हो, उन्हें तुरंत उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए.
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने यह आदेश सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह किसी भी नागरिक की जान बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करे.
सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि प्रशासन को सोनम वांगचुक की नियमित मेडिकल जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है और वे कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन करेंगे. कोर्ट ने सरकार के इस सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए रोजाना स्वास्थ्य निगरानी का आदेश जारी कर दिया.
गौरतलब है कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' पिछले 25 से अधिक दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है.
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से वे लगातार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उनकी इसी बिगड़ती हालत को देखते हुए कोर्ट से तुरंत दखल देने की मांग की गई थी.