टाटा की पश्चिम बंगाल में वापसी की सुगबुगाहट
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल में सिंगूर और टाटा मोटर्स के नैनो प्लांट को लेकर सालों तक चली राजनीतिक रस्साकशी के बाद अब एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है. राज्य सरकार ने टाटा समूह को बंगाल में फिर से आकर्षित करने के लिए नए सिरे से बातचीत शुरू कर दी है. उद्योग मंत्री तापस रॉय ने रविवार को इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि सरकार टाटा समूह के साथ लगातार संपर्क में है और राज्य में नए निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है.
हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और टाटा समूह किस क्षेत्र में नया निवेश करेगा, इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है. उद्योग मंत्री ने स्पष्ट किया कि ध्यान केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि टाटा के अन्य व्यवसायों के विस्तार और नई इकाइयों की स्थापना पर भी विचार किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल में टाटा समूह पहले से ही आईटी, धातु, हॉस्पिटैलिटी और रिटेल जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है.
इस नई पहल के बीच सिंगूर विवाद का अतीत भी सामने आ रहा है. वर्ष 2006 में नैनो परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए तीव्र आंदोलन के बाद, 2008 में टाटा ने अपनी परियोजना गुजरात स्थानांतरित कर ली थी.
इसके बाद अक्टूबर 2023 में एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम को टाटा मोटर्स को 765.78 करोड़ रुपये और 11% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया था.
उद्योग मंत्री तापस रॉय ने इस भारी भरकम वित्तीय देनदारी के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह कोर्ट का आदेश है और सरकार इस पर विचार कर रही है, हालांकि भुगतान की प्रक्रिया की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की जाएगी.
इस कानूनी और वित्तीय विवाद के बावजूद, टाटा समूह के साथ शुरू हुई यह नई वार्ता राज्य के औद्योगिक परिदृश्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अब देखना यह होगा कि यह चर्चा कितनी रंग लाती है.