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ऋतुब्रत बनर्जी गुट का असली 'तृणमूल' पर दावा

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23 जून 2026, 06:49 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

ऋतब्रत बनर्जी
ऋतब्रत बनर्जी

कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा सियासी भूचाल आ गया है. सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर कब्जे की लड़ाई अब सीधे चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच गई है. राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतुब्रत बनर्जी और उनके सहयोगियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को दरकिनार कर अपनी एक अलग 'तृणमूल राष्ट्रीय कार्यसमिति' का गठन कर लिया है. 


न्यू टाउन के एक आलीशान होटल में सोमवार को हुई इस गुप्त बैठक के बाद, बागी गुट ने मंगलवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय का रुख किया.

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नया मोर्चा खोलने वाले ऋतुब्रत बनर्जी के साथ इस नई कार्यसमिति के चेयरमैन अरूप रॉय, महासचिव संदीपन साहा और कोषाध्यक्ष अखरुज्जमां भी चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे. 


सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट ने नई तृणमूल कार्यसमिति के 30 सदस्यों और पदाधिकारियों के नामों की सूची के साथ-साथ सोमवार को हुई बैठक के मिनट्स भी चुनाव आयोग को सौंप दिए हैं. इसके साथ ही इन दस्तावेजों को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय चुनाव आयोग के मुख्यालय को भी ईमेल के जरिए भेज दिया गया है.


हालांकि, चुनाव अधिकारी से मुलाकात के बाद ऋतुब्रत बनर्जी ने इस पर खुलकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "हम आयोग को कोई ज्ञापन सौंपने नहीं आए थे. हमने सिर्फ कुछ दस्तावेज जमा किए हैं, जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता."


महाराष्ट्र फॉर्मूले पर पार्टी और प्रतीक 'जोड़ा फूल' पर दावा?


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऋतुब्रत बनर्जी का यह कदम ठीक वैसा ही है, जैसा महाराष्ट्र में भाजपा के समर्थन से साल 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पर और 2023 में अजीत पवार ने एनसीपी पर कब्जा करने के लिए उठाया था. ऋतुब्रत गुट पूरी कानूनी तैयारी और सलाह के साथ तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके चुनावी प्रतीक 'जोड़ा फूल' पर दावा ठोकने की रणनीति पर काम कर रहा है.


जब ऋतुब्रत बनर्जी से पूछा गया कि क्या उन्होंने चुनाव आयोग से 'जोड़ा फूल' प्रतीक की मांग की है, तो उन्होंने आत्मविश्वास से कहा, "हम प्रतीक का दावा क्यों करेंगे? इसमें दावा करने जैसा क्या है? दो-तिहाई विधायक हमारे साथ हैं. असली तृणमूल तो हम ही हैं." उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, वह पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर किया है.


ममता बनर्जी भी हुईं सक्रिय


इस बगावत की भनक लगते ही सोमवार रात को खुद ममता बनर्जी ने सक्रियता दिखाई. उन्होंने चुनाव आयोग को एक सूची भेजकर खुद को तृणमूल का राष्ट्रीय अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव बनाए रखने का दावा पेश किया. 


इससे पहले, बीते 5 जून को तृणमूल की बैठक में राष्ट्रीय कार्यसमिति में बदलाव किए गए थे, जिसके बाद कई नेता बागी खेमे में चले गए. पिछले हफ्ते ममता बनर्जी ने सूची में और फेरबदल करते हुए फिरहाद हकीम और अरूप विश्वास जैसे बड़े नामों को हटाकर राज्यसभा सांसद नदीमुल हक को शामिल किया था.


ममता बनर्जी की इस कार्रवाई के जवाब में ही ऋतुब्रत गुट ने सोमवार को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का 'विशेष सत्र' बुलाया था, जिसमें जिलों के कई बड़े नेता शामिल हुए थे. 


इसी बैठक में मध्य हावड़ा के विधायक अरूप रॉय को इस 'नई तृणमूल' का चेयरमैन घोषित किया गया और 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन कर दिया गया, जिसने अब ममता बनर्जी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP