"रेड कॉरिडोर" अब "ग्रोथ कॉरिडोर" में बदल रहा है: राजनाथ सिंह
नई दिल्ली । डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित जिलों की संख्या में आई भारी कमी पर मंगलवार को संतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी 'रेड कॉरिडोर' के नाम से कुख्यात थे, वे अब 'विकास गलियारों' (ग्रोथ कॉरिडोर) में बदल रहे हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि अगले साल मार्च तक देश से वामपंथी उग्रवाद की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी.
राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए, सिंह ने इस बड़े बदलाव का श्रेय पुलिस बल और सुरक्षाकर्मियों के अथक प्रयासों और बलिदानों को दिया. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का खौफ था, वहां अब सड़कें, अस्पताल, स्कूल और कॉलेज बन गए हैं. रक्षा मंत्री ने कहा, "जो क्षेत्र पहले 'नक्सलाइट हब' थे, वे अब 'शिक्षा के केंद्र' बन गए हैं."
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि नक्सली, जो कभी राज्य के खिलाफ हथियार उठाते थे, वे अब आत्मसमर्पण करके विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं. उन्होंने पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ, सभी अर्धसैनिक बलों और स्थानीय प्रशासन के सहयोगात्मक कार्य की सराहना की.
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के आंकड़ों के अनुसार, 2014 में 182 प्रभावित जिलों के मुकाबले अक्टूबर 2025 में यह संख्या घटकर मात्र 11 रह गई है. गृह मंत्रालय ने भी घोषणा की है कि 31 मार्च, 2026 तक 'रेड कॉरिडोर' इतिहास का हिस्सा बन जाएगा.
यह बयान भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देता है, जहां हिंसा की जगह अब विकास को प्राथमिकता दी जा रही है.