ProxyEarth लीक: मोबाइल नंबर से आधार, पता व लाइव लोकेशन उजागर
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में साइबर सुरक्षा को झकझोरने वाली एक भयावह घटना सामने आई है. 'ProxyEarth' नामक एक वेबसाइट पर केवल मोबाइल नंबर डालने मात्र से लाखों भारतीयों के आधार नंबर, घर का पता, वैकल्पिक नंबर, ईमेल आईडी और यहां तक कि लाइव लोकेशन तक उजागर हो रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह देश का अब तक का सबसे बड़ा डेटा लीक है, जो टेलीकॉम कंपनियों एयरटेल, जियो और वोडाफोन आइडिया के डेटाबेस से चुराए गए सरकारी दस्तावेजों पर आधारित है. आश्चर्यजनक रूप से, केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि साइट पिछले एक हफ्ते से सक्रिय है.
यह वेबसाइट, जिसे गूगल पर "प्रॉक्सी अर्थ" सर्च करने से आसानी से मिल जाता है, सिम रजिस्ट्रेशन के दौरान जमा किए गए संवेदनशील डेटा का इस्तेमाल कर रही है. यूजर्स का दावा है कि नंबर डालते ही स्क्रीन पर न केवल नाम, पिता का नाम और पता दिखता है, बल्कि मोबाइल टावर ट्रायंगुलेशन के जरिए वर्तमान लोकेशन भी ट्रैक हो जाती है.
साइट के क्रिएटर राकेश, जो खुद को प्रोग्रामर और वीडियो एडिटर बताते हैं, ने 'इंडिया टुडे' को दिए इंटरव्यू में कहा, "यह अवैध नहीं है. हमने कोई नया डेटा चुराया नहीं, बल्कि पहले से लीक हो चुकी जानकारी को एक जगह संकलित किया है. यह मेरी अन्य कमर्शियल साइट्स पर ट्रैफिक बढ़ाने का तरीका भी है."
राकेश की अन्य वेबसाइट्स पर पाइरेटेड कंटेंट मिलने की भी खबरें हैं, जो इस मामले को और संदिग्ध बनाती हैं. साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह लीक पुराना डेटा ही क्यों न हो, लेकिन आधार से जुड़े पैन, वोटर आईडी और बैंक अकाउंट जैसी जानकारी के सार्वजनिक होने से पहचान चोरी, फाइनेंशियल फ्रॉड और यहां तक कि स्टॉकिंग जैसे खतरे बढ़ गए हैं.
"लाइव लोकेशन का लीक होना बेहद खतरनाक है. यह अपराधियों को स्टॉकिंग या हरासमेंट के लिए हथियार दे सकता है," दिल्ली स्थित साइबर सिक्योरिटी फर्म के विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने चेतावनी दी.
अभियोजकों के अनुसार, यह डेटा लीक टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (टीएसपी) के डेटाबेस से हुआ है, जहां सिम कार्ड रजिस्ट्रेशन के समय आधार, पता और अन्य दस्तावेज जमा होते हैं. भारत के तीन बड़े नेटवर्क एयरटेल, जियो और वोडाफोन आइडिया के रिकॉर्ड्स से यह जानकारी ओपन वेब पर आ गई. हालांकि कुछ डेटा पुराना हो सकता है, लेकिन यह साइबर सिक्योरिटी सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करता है.
प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स ने सरकार की डेटा प्रोटेक्शन पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं. "डिजिटल इंडिया के दौर में नागरिकों का डेटा इस तरह बाजार में बिकना स्वीकार्य नहीं. टेलीकॉम कंपनियों को सख्ती से जवाबदेह बनाना होगा," एक एनजीओ के प्रतिनिधि ने कहा. साइट अभी भी सक्रिय है और सोशल मीडिया पर इसके प्रचार के जरिए लाखों विजिटर्स आ रहे हैं.
क्या करें आम नागरिक? विशेषज्ञों की सलाह
सतर्क रहें: कभी भी संदिग्ध साइट्स पर अपना नंबर या पर्सनल डेटा शेयर न करें.
चेक करें: अगर आपको फ्रॉड कॉल्स या संदिग्ध एक्टिविटी दिखे, तो तुरंत साइबर सेल (1930) या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें.
सुरक्षा बढ़ाएं: टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें और आधार/पैन को लिंक करने से पहले दोबारा वेरिफाई करें.
रिपोर्ट करें: ProxyEarth जैसी साइट्स को CERT-In (साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) को रिपोर्ट करें.
यह घटना न केवल व्यक्तिगत गोपनीयता पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम की विश्वसनीयता पर भी. सरकार और टेलीकॉम सेक्टर से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें. (Symbolic Photo)