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पेट्रोलियम क्षेत्र का केंद्र-राज्य सरकारों के खजाने में दशक भर में दोगुने से अधिक योगदान

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03 सित. 2025, 07:50 PM 3 मिनट में पढ़ें 3

पेट्रोल
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नई दिल्ली । डेस्क: पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC), भारत सरकार के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोलियम क्षेत्र ने पिछले दशक में केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 


यह क्षेत्र कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले विभिन्न करों, शुल्कों, रॉयल्टी, और लाभांश के माध्यम से अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता रहा है. 

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PPAC की रिपोर्ट, जो 15 प्रमुख तेल और गैस कंपनियों तथा पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों पर आधारित है, दर्शाती है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2024-25 (अनंतिम) तक कुल योगदान में लगभग 123% की वृद्धि हुई है.


वित्तीय वर्ष 2024-25 (अनंतिम) में, पेट्रोलियम क्षेत्र ने कुल 7,40,764.9 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिसमें केंद्र सरकार को 4,15,181.4 करोड़ रुपये और राज्य सरकारों को 3,25,583.5 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. 


केंद्र सरकार के लिए मुख्य स्रोतों में उत्पाद शुल्क (Excise Duty) 2,71,528.9 करोड़ रुपये, कच्चे तेल पर सेस (Cess on Crude Oil) 18,559.1 करोड़ रुपये, सीमा शुल्क (Customs Duty) 14,337.0 करोड़ रुपये, कॉर्पोरेट/आयकर (Corporate/Income Tax) 43,182.2 करोड़ रुपये, और लाभांश आय (Dividend Income) 22,095.4 करोड़ रुपये शामिल हैं. 


वहीं, राज्य सरकारों के लिए बिक्री कर/वैट (Sales Tax/VAT on POL Products) 3,02,058.5 करोड़ रुपये, रॉयल्टी (Royalty on Crude Oil/Natural Gas) 11,582.0 करोड़ रुपये, और एसजीएसटी/यूटीजीएसटी (SGST/UTGST) 10,792.1 करोड़ रुपये जैसे स्रोत प्रमुख रहे.


तुलनात्मक रूप से, वित्तीय वर्ष 2014-15 में कुल योगदान मात्र 3,32,619.7 करोड़ रुपये था, जिसमें केंद्र को 1,72,065.4 करोड़ रुपये और राज्य को 1,60,554.3 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे. उस वर्ष केंद्र के लिए उत्पाद शुल्क 99,068.4 करोड़ रुपये, कच्चे तेल पर सेस 15,869.3 करोड़ रुपये, और कॉर्पोरेट/आयकर 23,920.9 करोड़ रुपये मुख्य थे, जबकि राज्य के लिए बिक्री कर/वैट 1,37,157.3 करोड़ रुपये और रॉयल्टी 14,158.7 करोड़ रुपये प्रमुख स्रोत थे. 


2014-15 से 2024-25 तक की तुलना में कुल योगदान में 4,08,145.2 करोड़ रुपये (लगभग 123%) की वृद्धि हुई. केंद्र सरकार का हिस्सा 1,72,065.4 करोड़ से बढ़कर 4,15,181.4 करोड़ रुपये (141% वृद्धि) हो गया, मुख्यतः उत्पाद शुल्क और जीएसटी जैसे करों में वृद्धि के कारण. राज्य सरकारों का हिस्सा 1,60,554.3 करोड़ से 3,25,583.5 करोड़ रुपये (103% वृद्धि) तक पहुंचा, जिसमें वैट और एसजीएसटी की भूमिका उल्लेखनीय रही.


हालांकि, कुछ स्रोतों जैसे सेवा कर (Service Tax) और लाभांश वितरण कर (Dividend Distribution Tax) में कमी आई, जो जीएसटी लागू होने के बाद समाप्त हो गए.


इस दशक में योगदान में उतार-चढ़ाव भी देखा गया. 


उदाहरण के लिए, 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण कुल योगदान 6,72,718.8 करोड़ रुपये रहा, लेकिन 2021-22 में यह रिकॉर्ड 7,74,425.0 करोड़ रुपये तक पहुंचा. 


PPAC के आंकड़े दर्शाते हैं कि पेट्रोलियम क्षेत्र न केवल राजस्व का प्रमुख स्रोत है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में भी योगदान देता है. 


विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण के बावजूद, यह क्षेत्र लंबे समय तक महत्वपूर्ण बना रहेगा. यह रिपोर्ट 24 जून 2025 को PPAC की वेबसाइट पर अपलोड की गई थी और अनंतिम आंकड़ों पर आधारित है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP