ट्रंप के 'पाषाण युग' वाले बयान पर भड़के पेज़ेश्कियान
ट्रंप के 'पाषाण युग' वाले बयान पर भड़के पेज़ेश्कियान, पोप को लिखा पत्र
तेहरान । डेस्क: ईरान के तेहरान टाइम्स के हवाले से खबर है कि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो चौदहवें (Pope Leo XIV) को एक अत्यंत महत्वपूर्ण पत्र भेजा है.
इस पत्र में उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया सैन्य हमलों के खिलाफ पोप द्वारा अपनाए गए "नैतिक, तर्कसंगत और निष्पक्ष" रुख के लिए आभार व्यक्त किया है.
इसके साथ ही, पेज़ेश्कियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें ट्रंप ने ईरान की ऐतिहासिक सभ्यता को नष्ट कर उसे 'पाषाण युग' में भेजने की धमकी दी थी.
अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था पर हमला
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने अपने संदेश में जोर देकर कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किया गया यह युद्ध केवल ईरान के खिलाफ नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर कानून के शासन (Rule of Law), अंतरराष्ट्रीय संधियों, मानवीय मूल्यों और दिव्य धर्मों की शिक्षाओं पर एक गंभीर प्रहार है.
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के खतरनाक और विनाशकारी दृष्टिकोण की भारी कीमत पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चुकानी पड़ेगी.
ईरानी राष्ट्रपति ने पोप के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के बयान पूर्ण शक्ति के भ्रम, अहंकार, दादागिरी और अत्यधिक महत्वाकांक्षा से उपजे हैं, जिसे मानवीय विवेक कभी स्वीकार या सहन नहीं कर सकता.
39 दिनों का युद्ध और भारी तबाही का मंजर
साझा किए गए विवरणों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध का शंखनाद किया था. युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर तेहरान में शहीद हो गए थे.
इस 39 दिनों तक चले भीषण युद्ध में बड़े पैमाने पर तबाही हुई. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में लगभग 3,500 लोग मारे गए.
अमेरिकी और इजरायली हमलों में न केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, बल्कि अस्पतालों, स्कूलों, आवासीय क्षेत्रों और नागरिक बुनियादी ढांचों को भी ध्वस्त कर दिया गया. युद्ध के पहले दिन दक्षिणी शहर मिनाब में एक अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल 'शजरेह तैयबा' प्राथमिक विद्यालय पर गिरी, जिसमें लगभग 170 लोग मारे गए, जिनमें अधिकांश स्कूली बच्चे थे.
संघर्ष विराम और कूटनीतिक गतिरोध
ईरान द्वारा फारस की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर की गई मजबूत जवाबी कार्रवाई के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के पास युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. इसके परिणामस्वरूप 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ, जिससे फिलहाल लड़ाई रुकी हुई है.
हालांकि, युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से किए जा रहे कूटनीतिक प्रयास अब तक विफल रहे हैं.
ईरान का आरोप है कि अमेरिका की "अत्यधिक और अनुचित मांगें" इस गतिरोध की मुख्य वजह हैं. पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान अभी भी कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधानों के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका की गैर-कानूनी मांगों के खिलाफ खड़ा होना होगा.
पोप लियो चौदहवें की शांति की अपील और युद्ध की निंदा
कैथोलिक धर्मगुरु पोप लियो चौदहवें ने इस सैन्य आक्रामक कार्रवाई की बार-बार और सार्वजनिक रूप से निंदा की है. उन्होंने शत्रुता को तुरंत समाप्त करने की मांग करते हुए विश्व नेताओं से सैन्य वृद्धि के बजाय संवाद को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है.
पोप ने चेतावनी दी कि अत्यधिक बल का प्रयोग और आम नागरिकों को प्रभावित करने वाले हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और नैतिक शिक्षाओं के पूरी तरह खिलाफ हैं.
पोप ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि "सच्ची ताकत जीवन की रक्षा करने में है."
डोनाल्ड ट्रंप का पोप पर तीखा पलटवार: बढ़ा विवाद
पोप की शांति अपील और आलोचना से बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर तीखा हमला बोला. ट्रंप ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों में पोप लियो चौदहवें को "कमजोर" और "विदेश नीति पर अनुभवहीन" करार दिया.
ट्रंप ने आरोप लगाया कि पोंटिफ भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं समझते हैं और अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना पश्चिमी सुरक्षा हितों को नुकसान पहुंचाती है.
ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि पोप को अंतरराष्ट्रीय मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय "केवल धर्म तक ही सीमित रहना चाहिए."