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भारत में पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, इस बढ़ोतरी की 5 बड़ी वजहें

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15 मई 2026, 08:36 AM 4 मिनट में पढ़ें 2

पेट्रोल-डीजल
पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली । डेस्क: देश में आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है. सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर बढ़ते घाटे के बोझ को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है.


दिल्ली से हैदराबाद तक: महानगरों में ईंधन के नए दाम


इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं, डीजल अब 87.67 रुपये के बजाय 90.67 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.

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अन्य प्रमुख शहरों की बात करें तो मुंबई में पेट्रोल 106.68 रुपये और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. कोलकाता में पेट्रोल ने 108 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है और अब यह 108.70 रुपये पर बिक रहा है. चेन्नई में पेट्रोल 103.67 रुपये और हैदराबाद में सबसे अधिक 110.89 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है. दक्षिण भारत के बेंगलुरु में पेट्रोल 106.21 रुपये और भुवनेश्वर में 104.19 रुपये प्रति लीटर हो गया है. उत्तर भारत के गुरुग्राम, नोएडा और चंडीगढ़ में भी कीमतें 97 से 98 रुपये के बीच बनी हुई हैं, जबकि जयपुर में पेट्रोल 107.97 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.


चुनाव खत्म होते ही लगा झटका?


दिलचस्प बात यह है कि यह बढ़ोतरी असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के ठीक 16 दिन बाद हुई है. चुनाव के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू कीमतों को स्थिर रखा गया था. अब चुनाव खत्म होते ही कंपनियों ने कीमतों में संशोधन शुरू कर दिया है.


आखिर क्यों बढ़ीं कीमतें? समझें 5 मुख्य कारण


1. पश्चिम एशिया संघर्ष और कच्चा तेल


ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है. संघर्ष से पहले कच्चा तेल 70-72 डॉलर प्रति बैरल था, जो तनाव के चरम पर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. वर्तमान में यह 104-110 डॉलर के उच्च स्तर पर बना हुआ है, जिससे भारत के लिए आयात महंगा हो गया है.


2. होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान


दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है. भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 30 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से आता है. इस क्षेत्र में असुरक्षा के कारण आपूर्ति रुकने का डर पैदा हो गया है, जिससे तेल की कीमतों में 'रिस्क प्रीमियम' जुड़ गया है.


3. डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया


भारतीय रुपया इस साल एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही है. शुक्रवार को रुपया 29 पैसे टूटकर 95.93 प्रति डॉलर पर आ गया. चूंकि भारत अपनी तेल खरीद डॉलर में करता है, इसलिए रुपये की कमजोरी सीधे तौर पर घरेलू कीमतों को बढ़ा देती है.


4. तेल कंपनियों का भारी घाटा


केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, तेल कंपनियां रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं. पेट्रोल पर ₹14, डीजल पर ₹42 और एलपीजी सिलेंडर पर ₹674 प्रति यूनिट का अंडर-रिकवरी (घाटा) हो रहा था. इस घाटे की भरपाई के लिए यह 'कैलिब्रेटेड' यानी नपा-तुला कदम उठाया गया है.


5. लंबे समय से स्थिर थीं कीमतें


अप्रैल 2022 के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया था. केवल मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले 2 रुपये की प्रतीकात्मक कटौती हुई थी. सरकारी कंपनियों के विपरीत, निजी विक्रेताओं जैसे शेल (Shell) और नायरा एनर्जी ने पहले ही अपनी कीमतें बढ़ा दी थीं.


आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?


अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन महंगा होने का सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ेगा. इससे फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं. भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48% हो गई है, जबकि थोक महंगाई (WPI) 8.3% के साथ 42 महीने के उच्चतम स्तर पर है.


प्रधानमंत्री की अपील: ईंधन बचाएं


बढ़ते विदेशी मुद्रा संकट और तेल आयात पर निर्भरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन संरक्षण की अपील की है. उन्होंने लोगों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, कारपूलिंग अपनाने और संभव होने पर 'वर्क फ्रॉम होम' करने का सुझाव दिया है ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP