ईरान संग तनाव के बीच पेंटागन को तैयारी के निर्देश, ट्रंप का फैसला बाकी
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते कूटनीतिक गतिरोध और मध्य पूर्व में जारी भारी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय 'पेंटागन' ने अपनी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) को ईरान के खिलाफ फिर से बड़े सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल नए सिरे से सैन्य हमले शुरू करने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है.
तैयारियों का मुख्य उद्देश्य आवश्यकता पड़ने पर ईरान के परमाणु ठिकानों, ऊर्जा अवसंरचना और अन्य रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाना है. हालांकि, अभी तक इन हमलों के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है और पेंटागन की यह तैयारी सैन्य स्तर पर रणनीति का हिस्सा है, जिसे अभी तक राष्ट्रपति का अंतिम आदेश नहीं माना जा सकता.
यह नया मोड़ ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह से ठप पड़ी है. पिछले हफ्ते कैंप डेविड में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अध्यक्षता में हुई अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा दल की एक उच्च स्तरीय बैठक में ईरान और यमन में भड़कते संघर्ष पर गहन मंथन हुआ.
इस पूरी स्थिति का संबंध अमेरिका के आगामी मध्यावधि चुनावों और इजराइल के आगामी आम चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. यदि सैन्य संघर्ष दोबारा शुरू होता है, तो अमेरिकी और इजराइली बल एक साथ मिलकर कार्रवाई कर सकते हैं, जबकि यह भी आशंका जताई जा रही है कि जवाब में ईरान इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा पलटवार कर सकता है.
वर्तमान में मध्य पूर्व का पूरा क्षेत्र एक बेहद जटिल और गंभीर बहुस्तरीय संघर्ष का सामना कर रहा है. सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों ने लाल सागर तट और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल करने के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान छेड़ा है.
इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं. आभा और रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हुए हूती हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जिसके बाद सऊदी गठबंधन ने यमन में 80 से अधिक हूती ठिकानों पर भीषण बमबारी की है.
दूसरी ओर, इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनावों में 7 अक्टूबर 2023 के हमलों की सुरक्षा विफलताएं और उसके बाद शुरू हुए युद्ध प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं.