भारत-ईयू डील से पाकिस्तान परेशान, निर्यात बाजार छिनने का डर
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की सुगबुगाहट ने पाकिस्तानी व्यापारियों और निर्यातकों की नींद उड़ा दी है. पाकिस्तानी व्यवसायियों को डर है कि यदि भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह समझौता धरातल पर उतरता है, तो यूरोपीय बाजारों में पाकिस्तानी उत्पादों, विशेषकर कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
वर्तमान में पाकिस्तान को यूरोपीय संघ के साथ पहले से मौजूद एक समझौते के तहत वरीयता प्राप्त है, जिसके कारण उसके लगभग 80 प्रतिशत उत्पाद बिना किसी सीमा शुल्क के यूरोपीय बाजार में प्रवेश करते हैं.
इसके विपरीत, भारतीय उत्पादों पर अभी लगभग 12 प्रतिशत का शुल्क लगता है. पाकिस्तानी मीडिया 'डॉन' के अनुसार, यदि मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत का यह शुल्क कम या समाप्त कर दिया गया, तो भारतीय उत्पाद कीमत के मामले में पाकिस्तानी उत्पादों को कड़ी टक्कर देंगे.
आंकड़े बताते हैं कि बिना शुल्क के भी पाकिस्तान का वार्षिक कपड़ा निर्यात जहाँ 620 करोड़ डॉलर है, वहीं भारत 12 प्रतिशत शुल्क चुकाने के बावजूद 560 करोड़ डॉलर का निर्यात कर रहा है.
फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष साकिब फैयाज मागुन ने चेतावनी दी है कि भारत को मिलने वाली यह रियायत पाकिस्तान के बाजार प्रभुत्व को खत्म कर सकती है.
उन्होंने पाकिस्तानी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और देश में 'निर्यात आपातकाल' घोषित करने की मांग की है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान को इस प्रतिस्पर्धा में टिकना है, तो उसे बिजली की दरों में कमी और कर प्रणाली में सुधार जैसे कड़े कदम उठाने होंगे, अन्यथा हाथ से निकला बाजार वापस पाना नामुमकिन होगा.
चूंकि पाकिस्तान के कुल निर्यात का 24 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय संघ में जाता है, इसलिए यह समझौता पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है.