अटलांटिक की गहराइयों में 'परमाणु कचरे' का टाइम बम
रायपुर । सीजीखबर डेस्क: अटलांटिक महासागर के पेंदे में छिपा दशकों पुराना परमाणु कचरा अब वैश्विक पर्यावरण के लिए नई चिंता बन गया है. साल 1946 से 1990 के बीच 14 यूरोपीय देशों ने 2 लाख से अधिक रेडियोधर्मी कचरे के ड्रम महासागर में फेंक दिए थे. इन्हें महज 20 वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए कंक्रीट और बिटुमेन के खोल में बंद किया गया था, लेकिन आज इन सभी कंटेनरों की एक्सपायरी डेट पूरी तरह समाप्त हो चुकी है.
अतल गहराई में रोबोटिक वाहन 'UlyX' की स्कैनिंग
फ्रांसीसी राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (CNRS) और समुद्री शोध संस्थान 'इफ्रेमर' के संयुक्त नेतृत्व में शुरू हुए 'नोडसम' (NODSSUM) मिशन ने इस कचरे का सटीक स्थान तलाशने के लिए 16,000 फीट की गहराई में अभियान चलाया है. साल 1984 के बाद पहली बार इस क्षेत्र का व्यवस्थित सर्वेक्षण किया गया. इस मिशन में 15 फीट लंबे स्वायत्त रोबोट 'UlyX' को उतारा गया, जिसने 64 वर्ग मील के विशाल समुद्री तल को उच्च-क्षमता वाले सोनार से स्कैन किया. इसके बाद रोबोट ने समुद्र की तली के बिल्कुल करीब जाकर सड़ रहे ड्रमों की स्पष्ट तस्वीरें लीं, जिससे उनके क्षरण की स्थिति का पता चला है.
रेडियोधर्मी लीक और ऐतिहासिक परमाणु अवशेषों की पहेली
वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पहचानना है कि समुद्र में मौजूद रेडियोधर्मी तत्व वास्तव में इन ड्रमों से लीक हुए हैं या यह अतीत का बैकग्राउंड रेडिएशन है. इस समुद्री क्षेत्र में 20वीं सदी के वायुमंडलीय परमाणु परीक्षणों, 1986 की चेरनोबिल त्रासदी और तटीय परमाणु संयंत्रों के अवशेष पहले से मौजूद हैं. इस अंतर को स्पष्ट करने के लिए शोधकर्ताओं ने समुद्री तलछट और गहरे पानी की मछलियों के 300 से अधिक नमूने एकत्र किए हैं, ताकि ड्रमों के भीतर मौजूद कचरे के विशिष्ट आइसोटोपिक हस्ताक्षरों की पहचान की जा सके.
'नॉटिल' पनडुब्बी से नमूनों का सटीक परीक्षण
अभियान के दूसरे चरण में रोबोट द्वारा तैयार किए गए नक्शों की मदद से 'नॉटिल' नामक मानव-चालित पनडुब्बी को गहराई में भेजा गया है. रोबोटिक सर्वे के विपरीत, यह पनडुब्बी अपने यांत्रिक हाथों का उपयोग करके क्षतिग्रस्त ड्रमों के ठीक बगल से पानी, जीवों और मिट्टी के सटीक नमूने ले रही है. वैज्ञानिक इन नमूनों के माध्यम से यह गणना कर रहे हैं कि रिसाव से निकले रेडियोधर्मी पदार्थ गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में कितनी दूर तक फैल चुके हैं.