अमरीका भारत में बेचना चाहता है 'मांसाहारी दूध'
नई दिल्ली । डेस्क: दूध, जिसे हम सभी अपने स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक और प्रोटीन, कैल्शियम का प्रमुख स्रोत मानते हैं, भारत में हर घर का हिस्सा है. बच्चों के विकास और पोषण के लिए इसे भोजन के साथ परोसा जाता है. भारत में दूध को शुद्ध माना जाता है और इसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, जैसे पूजा और पंचामृत में उपयोग किया जाता है. विशेष रूप से, भारत की बड़ी शाकाहारी आबादी के लिए दूध प्रोटीन का मुख्य स्रोत है.
लेकिन हाल ही में 'मांसाहारी दूध' का मुद्दा चर्चा में है, खासकर भारत और अमरीका के बीच व्यापार समझौते की संभावनाओं के बाद. आइये जानते हैं कि यह 'मांसाहारी दूध' क्या है और यह भारत के दूध से कैसे अलग है.
'मांसाहारी दूध' शब्द सुनकर भारतीयों के लिए आश्चर्य होना स्वाभाविक है, क्योंकि दूध को हमेशा शाकाहारी माना जाता है. लेकिन अमरीका में यह शब्द उन गायों के दूध के लिये इस्तेमाल होता है, जिन्हें पशु-आधारित चारा, जैसे मांस या रक्त-मिश्रित भोजन खिलाया जाता है.
साधारण शब्दों में, जिन गायों को मांस, हड्डी, चर्बी या रक्त से बने चारे का सेवन कराया जाता है, उनके दूध को 'मांसाहारी दूध' कहा जाता है. अमरीका में किसान गायों का वजन बढ़ाने के लिये इस तरह का चारा उपयोग करते हैं, जिसमें सुअर, मुर्गी, मछली, घोड़े, बिल्ली या कुत्ते का मांस शामिल हो सकता है. गाय, जो स्वाभाविक रूप से शाकाहारी होती हैं, उनके लिए यह चारा अप्राकृतिक है, इसलिये इससे प्राप्त दूध को शाकाहारी नहीं माना जाता.
अमरीका, यूरोप, रूस, मैक्सिको, थाईलैंड, फिलीपींस और ब्राजील जैसे देशों में गायों को मांसाहारी चारा खिलाना आम है.
वहीं, जापान, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी में भी इस तरह का दूध सामान्य रूप से उपयोग होता है. दूसरी ओर, भारत में गायों को मुख्य रूप से शाकाहारी चारा जैसे सूखी घास, हरा चारा, मक्का, गेहूं के दाने और भूसी खिलाई जाती है.
हालांकि, कुछ बड़े डेयरी फार्म विदेशी चारा पद्धतियों को अपनाने लगे हैं, लेकिन भारत में अभी तक मांसाहारी चारा उपयोग नहीं किया जाता.
कई शोधों में यह पाया गया है कि मांसाहारी चारा खाने वाली गायों का दूध पोषण की दृष्टि से मनुष्यों के लिये सुरक्षित है और इससे स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं होता. फिर भी, भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण यह दूध स्वीकार्य नहीं हो सकता.
भारत और अमरीका के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा जारी है. अमरीका चाहता है कि भारत उसके डेयरी उत्पादों, औद्योगिक सामान, इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन, पेट्रोकेमिकल्स, सेब, ट्री नट्स और जीएम फसलों पर शुल्क में छूट दे.
वहीं, भारत की मांग है कि वस्त्र, आभूषण, चमड़े के सामान, कपड़े, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तेलबीन, अंगूर और केले जैसे श्रम-आधारित निर्यात उत्पादों पर अमरीका शुल्क में छूट दे. इस समझौते की औपचारिक घोषणा को लेकर उत्सुकता चरम पर है.