नोबेल शांति पुरस्कार पाने के आकांक्षी ट्रंप ने इन 7 देशों पर 2025 में बरसाये बम !
रायपुर । संवाददाता: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ओर खुद को नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित दावेदार के रूप में पेश करते रहे हैं, तो दूसरी ओर वर्ष 2025 में उनके नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने दुनिया के सात देशों में सीधे सैन्य हमले और बमबारी की. हाल के दिनों में इन कार्रवाइयों की पुष्टि खुद ट्रंप प्रशासन और पेंटागन की ओर से की गई है. इन हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका की भूमिका, मानवाधिकारों और “शांति” की परिभाषा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सबसे ताज़ा मामला वेनेजुएला का है. इस सप्ताह डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं स्वीकार किया कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में एक डॉकिंग सुविधा पर हमला किया. ट्रंप का दावा है कि यह ठिकाना ड्रग तस्करी से जुड़ा हुआ था. यह वेनेजुएला की जमीन पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का पहला खुला मामला बताया जा रहा है. इससे पहले कैरेबियन सागर में कथित ड्रग तस्करी से जुड़े जहाजों पर हमले किए गए थे, जिनमें दर्जनों लोगों की मौत की बात मानवाधिकार संगठनों ने कही है. काराकास ने इन हमलों को सत्ता परिवर्तन की साजिश बताया है.
दूसरा देश है नाइजीरिया. क्रिसमस के दिन अमेरिका ने नाइजीरिया के सोकोतो प्रांत में कथित इस्लामिक स्टेट (ISIS) से जुड़े समूहों पर हवाई हमले किए. ट्रंप प्रशासन ने इन हमलों को “आतंकवाद विरोधी कार्रवाई” बताया, जबकि नाइजीरियाई सरकार पर धार्मिक हिंसा को लेकर अमेरिकी राजनीतिक दबाव भी साफ नजर आया. यह पश्चिमी अफ्रीका में अमेरिका की पहली प्रत्यक्ष घातक सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है.
तीसरा नाम सोमालिया का है, जहां अमेरिकी हवाई हमले वर्षों से होते रहे हैं, लेकिन 2025 में इनमें अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष अकेले 100 से अधिक अमेरिकी हमले हुए, जिनमें अल-शबाब और ISIS-सोमालिया को निशाना बनाया गया. हालांकि, स्वतंत्र जांचों में बच्चों सहित नागरिकों की मौत की पुष्टि भी हुई है, जिनके आंकड़े अमेरिका सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करता.
सीरिया चौथा देश है, जहां दिसंबर में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले के जवाब में अमेरिका ने ISIS के 70 ठिकानों पर बमबारी की. ट्रंप ने इसे “भयानक बदला” करार दिया. अमेरिका पहले से ही सीरिया में सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है और इन हमलों ने मध्य-पूर्व में तनाव को और गहरा किया.
पांचवां और सबसे संवेदनशील मामला ईरान का है. जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों-नतांज, इस्फहान और फोर्दो-पर हमले किए. ट्रंप ने इसे ईरान के “परमाणु खतरे” को रोकने के लिए जरूरी बताया. इन हमलों के बाद ईरान ने कतर में अमेरिकी बेस पर प्रतीकात्मक जवाबी हमला किया और कुछ समय के लिए ईरान-इजराइल युद्ध जैसी स्थिति बन गई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए.
छठा देश है यमन. जनवरी 2024 से शुरू हुए हमले 2025 में ट्रंप प्रशासन के तहत और तेज हो गए. हूती विद्रोहियों के खिलाफ चलाए गए इन हमलों में बंदरगाहों, हवाई अड्डों और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा. यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए, जबकि अमेरिका ने हूती लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया.
सातवां देश इराक है, जहां मार्च 2025 में अमेरिका ने अल-अनबार प्रांत में हवाई हमला कर ISIS के शीर्ष नेता को मारने का दावा किया. ट्रंप ने इस कार्रवाई को “शांति के लिए ताकत” का उदाहरण बताया. इराक सरकार ने भी इस ऑपरेशन की पुष्टि की, हालांकि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर चिंताएं बनी रहीं.
इन सात देशों-वेनेजुएला, नाइजीरिया, सोमालिया, सीरिया, ईरान, यमन और इराक-में की गई अमेरिकी बमबारी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या सैन्य ताकत के जरिए शांति लाई जा सकती है.
एक ओर डोनाल्ड ट्रंप खुद को शांति का पक्षधर बताते हैं और नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा में रहते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके कार्यकाल में दुनिया के कई हिस्से अमेरिकी बमों की गूंज से दहलते रहे. यही विरोधाभास आज वैश्विक राजनीति में सबसे बड़ी बहस का विषय बन चुका है. (Symbolic Photo)