US को छोड़ रहे नोबेल विजेता दंपति अभिजीत बनर्जी
ट्रंप के US को छोड़ रहे नोबेल विजेता दंपति अभिजीत बनर्जी-एस्थर डफ्लो?
नई दिल्ली । डेस्क: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो अमेरिका छोड़कर स्विट्जरलैंड चले जा रहे हैं. अगले साल के मध्य से वे स्विट्जरलैंड के जोहान्सबर्ग यूनिवर्सिटी में पढ़ाएंगे और वहीं रहेंगे. जोहान्सबर्ग यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख फ्लोरियन स्क्यूयर ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए बजट में कटौती के बाद से यह अटकलें लग रही हैं कि शैक्षणिक जगत के लोग देश छोड़ सकते हैं. क्या अभिजीत दंपति का यह फैसला भी इसी नीति से प्रेरित है? सवाल उठ रहे हैं.
अभिजीत बनर्जी और एस्थर डफ्लो की स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी में शामिल होने की खबर सबसे पहले फ्लोरियन स्क्यूयर ने प्रकाशित की. उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, "1 जुलाई 2026 से नोबेल विजेता एस्थर डफ्लो और अभिजीत बनर्जी जोहान्सबर्ग यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग में लेहमैन फाउंडेशन प्रोफेसर के रूप में शामिल होंगे. इसकी घोषणा करते हुए मैं उत्साहित हूं."
फ्लोरियन ने बताया कि दंपति वहां एक नया केंद्र (सेंटर फॉर डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स) स्थापित करेंगे. उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति यूनिवर्सिटी के लिए गौरव का विषय है और इससे संस्थान की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी.
स्विट्जरलैंड में हाल ही में 'लेहमैन सेंटर फॉर डेवलपमेंट, एजुकेशन, पब्लिक पॉलिसी' की स्थापना हुई है. ब्राजील की लेहमैन फाउंडेशन के अनुदान से बने इस संस्थान का नेतृत्व एस्थर और अभिजीत संभालेंगे. यहां वे अर्थशास्त्र, नीति मूल्यांकन पर अनुसंधान करेंगे.
वर्तमान में एस्थर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में पढ़ाती हैं. इंडिया टुडे के एक रिपोर्ट में एस्थर ने कहा, "नया लेहमैन सेंटर हमारे काम को विस्तार देने का अवसर देगा. इससे छात्रों को तैयार करने का मौका भी मिलेगा." अभिजीत ने अमेरिकी मीडिया को बताया, "भविष्य में जोहान्सबर्ग यूनिवर्सिटी हमारे अनुसंधान और नीति कार्य के लिए अवसर प्रदान करेगी, इसमें कोई संदेह नहीं."
सवाल उठ रहा है कि क्या यही अवसरों की तलाश में अभिजीत एमआईटी छोड़ रहे हैं? उन्होंने इस पर स्पष्ट टिप्पणी नहीं की.
ट्रंप की नीतियां: शिक्षा क्षेत्र पर असर
प्रसंगवश, ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल में खर्च घटाने का रास्ता अपनाया है. कई विश्वविद्यालयों का बजट कम किया गया. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को उनका गुस्सा झेलना पड़ा. ट्रंप ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि सरकारी शर्तें न मानने पर अनुसंधान के लिए सभी सरकारी सहायता बंद कर दी जाएगी.
मार्च में अमेरिका में शिक्षा विभाग बंद हो गया. इस निर्देश के अमल से शिक्षा क्षेत्र में केंद्रीय बजट रोका गया.
अब शिक्षा संबंधी फैसले राज्यों पर छोड़ दिए गए हैं. स्थानीय प्रशासन ही शिक्षा मुद्दों पर ध्यान देगा. नासा ने अपना नाम खो दिया और पहले ही बजट में कटौती हुई.
शैक्षणिक जगत के एक वर्ग ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कई शोधकर्ता अमेरिका छोड़ देंगे. अब अभिजीत और एस्थर ने भी देश छोड़ने का फैसला लिया. क्या पृष्ठभूमि में ट्रंप की नीतियां हैं? सवाल खड़ा हो रहा है.