फार्मा कंपनी के घूस में कोई कार्रवाई नहीं
नई दिल्ली । डेस्क: फार्मास्युटिकल कंपनी एबवी (AbbVie) द्वारा फरवरी-मार्च 2024 में 30 डॉक्टरों को 1.9 करोड़ रुपये की विदेश यात्रा और आतिथ्य प्रदान करने के मामले में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने कोई कार्रवाई नहीं की है. क्योंकि फार्मास्युटिकल विभाग (डीओपी) ने इन डॉक्टरों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है और अब तक एनएमसी को नाम नहीं भेजे हैं.
यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (यूसीपीएमपी) के तहत फार्मा कंपनियों को स्वास्थ्य पेशेवरों को यात्रा या आतिथ्य प्रदान करने की मनाही है. फार्मास्युटिकल विभाग द्वारा गठित एक विशेष समिति ने दिसंबर 2024 में पाया कि डॉक्टरों की विदेश यात्रायें इस नियम का उल्लंघन हैं. हालांकि, सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में 8 मई 2025 तक यह पता चला कि डॉक्टरों के नाम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को नहीं भेजे गए हैं.
एक अन्य आरटीआई आवेदन में नाम माँगने पर, फार्मास्युटिकल विभाग ने छह महीने बाद जवाब दिया कि यह जानकारी "निजी जानकारी का खुलासा करती है और सार्वजनिक हित में नहीं है," इसलिये इसे आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत नहीं दिया जा सकता. मई 2024 में, फार्मास्युटिकल विभाग को शिकायत मिली थी कि एबवी ने चिकित्सा सम्मेलनों के नाम पर मोनाको और पेरिस की यात्रा प्रायोजित की थी, जिसके सबूत में फ्लाइट टिकट और होटल बुकिंग शामिल थे.
फार्मास्युटिकल विभाग ने एबवी की जाँच के लिए एक विशेष ऑडिट समिति गठित की और शिकायत को ऑर्गेनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (ओपीपीआई) की नैतिकता समिति को भेजा. ओपीपीआई ने कोई अनियमितता नहीं पाई, लेकिन विशेष ऑडिट में यूसीपीएमपी का "स्पष्ट उल्लंघन" सामने आया. फार्मास्युटिकल विभाग की शीर्ष समिति ने ऑडिट की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि एबवी ने नियम तोड़े. फिर भी, 23 दिसंबर 2024 के आदेश में कंपनी को केवल "चेतावनी" देकर छोड़ दिया गया.
एनएमसी ने मई 2025 में एक आरटीआई जवाब में बताया कि "30 डॉक्टरों की सूची अभी तक इस आयोग को प्राप्त नहीं हुई है." नेत्र रोग विशेषज्ञ और आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. केवी बाबू, जिन्होंने ये आवेदन दायर किए, ने कहा, "डीओपी दोषी डॉक्टरों को बचा रहा है. वे नाम उजागर नहीं कर रहे और अपनी ही समिति की सिफारिश को लागू करने में विफल रहे हैं."
डॉ. बाबू ने आगे कहा, "इस मामले में एकमात्र सजा फार्मा कंपनी को चेतावनी देना है, जबकि विभाग की विशेष ऑडिट और शीर्ष समिति ने स्पष्ट उल्लंघन पाया. फिर भी, दोषी डॉक्टरों के नाम छिपाये जा रहे हैं और इसे सार्वजनिक हित से बाहर बताया जा रहा है. सबसे बुरा, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को कार्रवाई के लिए नाम तक नहीं भेजे गये."