नासिक TCS केस की मुख्य आरोपी निदा खान गिरफ्तार
नासिक । डेस्क: महाराष्ट्र पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए नासिक टीसीएस (TCS) मामले की मुख्य आरोपी और निलंबित कर्मचारी निदा खान को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी बलात्कार और यौन शोषण के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के करीब 40 दिनों के बाद हुई है.
नासिक एसआईटी (SIT), छत्रपति संभाजीनगर क्राइम ब्रांच और पुलिस कमिश्नर के एक संयुक्त अभियान के दौरान गुरुवार देर रात निदा खान को हिरासत में लिया गया.
सहायक पुलिस आयुक्त और एसआईटी प्रमुख संदीप मिटके ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है. गौरतलब है कि निदा खान पर एक 23 वर्षीय महिला ने गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और वेशभूषा बदलने जैसी बातें शामिल थीं.
इस मामले में पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई हैं. हाल ही में नासिक की एक अदालत ने निदा की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि आरोपी के संबंध मलेशिया और मालेगांव से हो सकते हैं, जिसके चलते हिरासत में पूछताछ जरूरी है.
नासिक टीसीएस (TCS) मामला मुख्य रूप से कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, मानसिक शोषण और कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़ा है. यह मामला मार्च 2026 में तब प्रकाश में आया जब एक 23 वर्षीय महिला कर्मचारी ने देओलाली कैंप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत के अनुसार, सहकर्मियों द्वारा शादी का झांसा देकर यौन शोषण किया गया और उन पर धार्मिक प्रथाओं को अपनाने के लिए दबाव डाला गया.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. जांच के दौरान यह बात सामने आई कि उत्पीड़न की घटनाएं साल 2022 से चल रही थीं, लेकिन कंपनी के आंतरिक शिकायत तंत्र और एचआर विभाग ने इन पर उचित कार्रवाई नहीं की.
पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के लिए करीब 40 दिनों तक महिला पुलिस अधिकारियों को कंपनी के भीतर अंडरकवर एजेंट के रूप में भी तैनात किया था.
अब तक इस मामले में कुल 9 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और निदा खान सहित लगभग 7-8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने शिकायतों को नजरअंदाज किया और पीड़ितों पर धर्म परिवर्तन व इस्लामी रीति-रिवाजों को मानने के लिए दबाव बनाया.
हालांकि, टीसीएस ने स्पष्ट किया है कि निदा खान एचआर मैनेजर नहीं बल्कि एक 'प्रोसेस एसोसिएट' थीं. कंपनी ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू की है.