सिगरेट-तंबाकू की लत छुड़ाने का दावा, लेकिन खुद बन रहे नया नशा
रायपुर । सीजीखबर डेस्क: देश में तंबाकू और सिगरेट की लत से छुटकारा दिलाने के नाम पर बिक रहे निकोटीन उत्पादों को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं. ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड यानी डीटीएबी ने जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सिफारिश की है कि अब किसी भी नए निकोटीन फॉर्मूलेशन को मंजूरी न दी जाए. यह कदम राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की उस चेतावनी के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि निकोटीन पाउच न केवल अत्यधिक नशे की लत डालते हैं बल्कि सेहत के लिए अलग से गंभीर जोखिम भी पैदा करते हैं.
लत छुड़ाने के नाम पर नई निर्भरता का खतरा
अक्सर देखा जाता है कि लोग सिगरेट या गुटखा छोड़ने के लिए निकोटीन पाउच, गम या लोज़ेंज का सहारा लेते हैं. शुरुआती दौर में यह विकल्प मददगार लगता है, लेकिन धीरे-धीरे व्यक्ति तंबाकू छोड़कर इसी निकोटीन पाउच का आदी हो जाता है. यानी एक नशे से बाहर निकलने की कोशिश में इंसान दूसरे नशे के जाल में फंस जाता है. इसके अलावा चिकित्सा अध्ययनों में भी यह बात साबित नहीं हो सकी है कि निकोटीन पाउच धूम्रपान छुड़ाने में पूरी तरह से असरदार हैं. तंबाकू नियंत्रण का असली मकसद व्यक्ति को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाना है, न कि उसे किसी नए निकोटीन उत्पाद का आदी बनाना.
युवाओं और नाबालिगों में तेजी से बढ़ता चलन
हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से जुड़े संस्थान द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि युवा और कामकाजी लोग तेजी से इन निकोटीन पाउच की चपेट में आ रहे हैं. ई-कॉमर्स वेबसाइट्स, हुक्का दुकानों और स्थानीय बाज़ारों में इनकी आसान पहुंच और आकर्षक मार्केटिंग की वजह से नाबालिग भी इनका शिकार बन रहे हैं. दुकानों पर बिना किसी रोक-टोक और स्वाद वाले विकल्पों (फ्लेवर्ड वर्ज़न) में इनकी उपलब्धता ने युवाओं में इसे एक फैशन की तरह बढ़ावा दिया है, जो भविष्य के लिए एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है.
डॉक्टर के पर्चे पर ही मिले बिक्री की अनुमति
आम जनता की सुरक्षा को देखते हुए नियमों को और सख्त करने की सख्त जरूरत है. जिस तरह नशीली या गंभीर बीमारियों की दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची के खरीदना गैर-कानूनी होता है, ठीक उसी तरह निकोटीन पाउच और इससे जुड़ी सभी दवाओं की बिक्री केवल डॉक्टर के लिखे पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) पर ही होनी चाहिए. इसके साथ ही नाबालिगों को इनकी बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगाई जानी चाहिए और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इनकी पहुंच को कड़ाई से नियंत्रित किया जाना चाहिए. इन्हें केवल मेडिकल स्टोर से ही बेचा जाना चाहिये.
नियमों में सख्ती और ऑनलाइन निगरानी की तैयारी
ड्रग्स रेगुलेटर अब इन उत्पादों की बिक्री के नियमों को कड़ा करने पर विचार कर रहा है. स्वाद वाले निकोटीन उत्पादों की ओवर-द-काउंटर यानी बिना पर्चे वाली बिक्री को सीमित करने और केवल सामान्य (अनफ्लेवर्ड) 2 मिलीग्राम निकोटीन गम को ही रियायत देने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा, तंबाकू कंपनियों द्वारा इन उत्पादों की बिक्री पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया है ताकि व्यावसायिक हितों के कारण लोगों की सेहत से खिलवाड़ न हो सके.