नेपाल बाढ़: चीनी दूतावास की सफाई- 'नहीं छुपाया गया कोई अलर्ट'
काठमांडू । डेस्क: चीन और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र रसगुवागढी-केरुङ में आई भयावह बाढ़ और भूस्खलन को लेकर चीनी दूतावास ने शुरुआती चेतावनी न देने के आरोपों का खंडन किया है. दूतावास ने एक बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक करार दिया. इस आपदा में नेपाल में 165 और चीन में 3 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं.
नेपाल में यह आरोप लगाया जा रहा था कि चीन की तरफ से समय पर चेतावनी न मिलने और चीनी सीमा में बने बांध के टूटने से नेपाल में भारी तबाही हुई.
हालांकि, चीनी दूतावास ने इन दोनों दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 26 अगस्त की सुबह आए एक तीव्र भूकंपीय झटके के कारण नेपाल की तरफ एक विशाल हिमस्खलन हुआ, जिसने आगे चलकर भूस्खलन का रूप ले लिया और दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में तबाही मचाई.
नेपाली अधिकारियों की शुरुआती जांच भी इसी तथ्य की पुष्टि करती है.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में रसूवागढ़ी सीमा बिंदु से 20 किलोमीटर दूर ग्लेशियर से चट्टान खिसकने और ल्हांडे नदी में मलबा गिरने के संकेत मिले हैं.
इस भीषण फ्लैश फ्लड के कारण रसूवागढ़ी, चिलिमे और त्रिशूली जैसे छह प्रमुख जलविद्युत स्टेशन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, साथ ही दोनों देशों को जोड़ने वाले पुल, सड़कें और संचार तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं.