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नेपाल ने वैश्विक मंच पर मांगी क्लाइमेट कंपनसेशन की मांग

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03 सित. 2026, 06:36 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

नेपाल बाढ़
नेपाल बाढ़

काठमांडू । डेस्क: ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से जूझ रहे नेपाल ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुआवजे की आवाज बुलंद कर दी है. हाल ही में हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण तबाही के बाद, नेपाल सरकार ने जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार दुनिया के प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों से मुआवजे की मांग की है.


नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बड़े उत्सर्जक देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी रेखांकित करते हुए कहा, "जलवायु परिवर्तन के लिए ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों का यह नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वे नेपाल जैसे सबसे संवेदनशील और प्रभावित राष्ट्रों को मुआवजा दें." 

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उन्होंने जानकारी दी कि नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और वैश्विक मंचों पर आधिकारिक रूप से एक "फॉर्मल क्लाइमेट कंपेनसेशन क्लेम लेटर" (जलवायु मुआवजा पत्र) दाखिल कर दिया है. सरकार का स्पष्ट तर्क है कि लांगटांग लिरुंग पर्वत शिखर के पास ग्लेशियर का अचानक फटना और उससे हुई तबाही सीधे तौर पर वैश्विक तापमान में वृद्धि का नतीजा है, जिसकी भारी कीमत नेपाल को चुकानी पड़ रही है.


1280 से अधिक मौतें और सुरंगों में फंसे श्रमिकों का रेस्क्यू जारी


उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में ग्लेशियर टूटने से मलबे, कीचड़ और पानी का ऐसा सैलाब आया जिसने पूरे के पूरे गांवों, सड़कों और पुलों को बह दिया. इस जलप्रलय में अब तक 1,280 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,600 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.


रसुवा जिले सहित प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. जलविद्युत परियोजनाओं (हाइड्रोपावर प्लांट) की सुरंगों में फंसे सैकड़ों श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारी बुलडोजर और मशीनें लगाई गई हैं. नेपाली सेना के अधिकारियों का कहना है कि टनल और पावर हाउस का ढांचा बड़ा होने के कारण यह उम्मीद बनी हुई है कि पूरी जगह जलमग्न नहीं हुई होगी और कई जिंदगियां अंदर सुरक्षित हो सकती हैं. दूर-दराज के प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर और ज़िपलाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है.


हजारों परिवार बेघर, पुनर्वास की नई रणनीति


इस त्रासदी ने बड़े पैमाने पर विस्थापन और तबाही मचाई है. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, लगभग 20,000 मकानों का पुननिर्माण करना होगा, जिनमें से 7,500 घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हजारों विस्थापित लोग फिलहाल अस्थायी राहत शिविरों और स्कूलों में शरण लिए हुए हैं.


प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि पुरानी और जोखिम भरी जगहों पर दोबारा घर बनाना खतरे से खाली नहीं होगा. इसलिए सरकार अब प्रभावित समुदायों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर नए सिरे से बस्तियां बसाने की योजना पर काम कर रही है. वहीं, राजधानी काठमांडू में फॉरेंसिक टीमें शवों की पहचान करने के लिए डीएनए जांच और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का सहारा ले रही हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP