NEET और OSM विवाद: संसदीय समिति ने NTA-CBSE से मांगे लिखित जवाब
नई दिल्ली । डेस्क: संसदीय पैनल ने देश की दो प्रमुख परीक्षा एजेंसियों नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने दोनों एजेंसियों से कई गंभीर सवाल पूछते हुए लिखित जवाब तलब किया है.
समिति ने एनटीए से स्पष्ट रूप से 'पेपर लीक' की परिभाषा मांगी है और यह बताने को कहा है कि साल 2018 में अपनी स्थापना के बाद से उसने जितने भी इम्तिहान कराए हैं, उनमें से कितने पेपर लीक हुए हैं.
इसके अलावा, एनटीए से नीट-यूजी 2024 परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों पर (सीबीआई जांच से अलग) की गई आंतरिक जांच की रिपोर्ट भी मांगी गई है. पैनल ने इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति द्वारा दी गई 101 सिफारिशों पर एनटीए द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी जून 10 तक जमा करने का निर्देश दिया है.
दूसरी ओर, सीबीएसई को परीक्षा मूल्यांकन से जुड़े ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में आई बड़ी खामियों और निविदा (आरएफपी) की शर्तों में किए गए बदलावों पर जून 8 तक जवाब देने को कहा गया है.
संसदीय समिति ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि ओएसएम का ठेका पाने वाली कंपनी 'कोएम्प्ट' (COEMPT) और उसके निदेशकों का संबंध पूर्व में 'ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज' से था, जिसके सॉफ्टवेयर को 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों में हुई बड़ी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था.
समिति ने पूछा है कि कंपनी की पृष्ठभूमि जानने के बावजूद उसे यह ठेका कैसे दिया गया. साथ ही, निविदा शर्तों में से खराब रिकॉर्ड वाली कंपनियों को बाहर रखने और काली सूची में डाली गई कंपनियों पर लगी पाबंदियों को क्यों ढीला किया गया, इस पर भी जवाब मांगा गया है.
छात्रों की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर समिति ने सवाल उठाया है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग क्वालिटी को 300 DPI से घटाकर 200 DPI करने और बिना पन्ना काटे स्कैन करने की अनिवार्य शर्त को आखिर क्यों हटाया गया. इन तमाम मुद्दों पर अब दोनों शीर्ष परीक्षा नियामक संस्थाओं को संसदीय समिति के समक्ष अपनी लिखित सफाई पेश करनी होगी.