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NCERT: मनुस्मृति की तारीफ और जाति व्यवस्था पर नया नजरिया

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27 जून 2026, 07:11 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

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नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' के एक अध्याय को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. इस किताब के "स्टेट एंड सोसाइटी अप टू 1000 CE" अध्याय में दावा किया गया है कि हिंदू धर्मग्रंथ सामाजिक और लैंगिक असमानता को बढ़ावा नहीं देते हैं. 


किताब में प्राचीन हिंदू ग्रंथ 'मनुस्मृति' की प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि यह महिलाओं के सम्मान की परंपरा को बढ़ावा देती है.

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अध्याय के अनुसार, प्रारंभिक वैदिक ग्रंथों में जन्म के आधार पर कोई निश्चित सामाजिक स्थिति तय नहीं थी, और वर्ण व्यवस्था पूरी तरह ज्ञान और मूल्यों पर आधारित थी. इसमें 'समत्व' (समानता) के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा गया है कि महाभारत के विभिन्न पात्रों ने भी इस समानता को बनाए रखा. 


नई पुस्तक में चार-चरणीय जाति व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) को लचीला और गतिशील बताया गया है, जहां व्यवसाय वंशानुगत नहीं थे.


इसके अलावा, किताब में मनुस्मृति के एक श्लोक का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार "जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं." 


हालांकि, NCERT का यह नया दृष्टिकोण उसकी अपनी ही कक्षा 6 की पुरानी इतिहास की किताब 'अवर पास्ट-1' से बिल्कुल अलग है. पुरानी किताब में स्पष्ट लिखा था कि महिलाओं और शूद्रों को वेद पढ़ने और अनुष्ठान करने की अनुमति नहीं थी और समाज में उनका स्थान जन्म के आधार पर तय होने लगा था, जिसके बाद छुआछूत जैसी प्रथाएं आईं.


कई शोध और विशेषज्ञ भी इस नए बदलाव पर सवाल उठा रहे हैं. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के एक अध्ययन के मुताबिक, चतुरवर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति ऋग्वेद के पुरुष सूक्त से हुई है, और मनुस्मृति ने उच्च जातियों के विशेषाधिकारों को सुरक्षित रखते हुए महिलाओं को पारिवारिक संपत्ति के रूप में पेश किया था. 


दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एन. सुकुमार का कहना है कि बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने जाति व्यवस्था को केवल श्रम का विभाजन नहीं, बल्कि 'श्रमिकों का विभाजन' माना था. जानकारों के अनुसार, धर्मग्रंथों से चुनिंदा सकारात्मक बातें उठाकर जाति और लैंगिक पदानुक्रम के ऐतिहासिक सच को नजरअंदाज करना अकादमिक रूप से चिंताजनक है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP