UPI पर मर्चेंट चार्ज: PhonePe और Google Pay की बढ़ेगी कमाई
मुंबई । डेस्क: भारत में सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के 6 साल पुराने 'मुफ्त उपयोग' का दौर अब समाप्त होने जा रहा है. नियामक प्राधिकरणों द्वारा 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने की अनुमति मिलने के बाद डिजिटल पेमेंट उद्योग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. इस निर्णय से बाजार पर दबदबा रखने वाले फोनपे (PhonePe) और गूगल पे (Google Pay) को सालाना करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है.
वित्तीय विश्लेषण फर्म बर्नस्टीन के अनुसार, मार्च 2028 तक यह नया शुल्क उद्योग के लिए 1.1 अरब डॉलर (लगभग 9,000 करोड़ रुपये) का नया राजस्व अवसर तैयार कर सकता है. चूंकि फोनपे और गूगल पे मिलकर भारत के कुल यूपीआई लेनदेन मूल्य का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं, इसलिए इस अतिरिक्त राजस्व का करीब 900 मिलियन डॉलर (लगभग 7,500 करोड़ रुपये) सीधा इन्हीं दोनों दिग्गजों की झोली में जाने की उम्मीद है.
ग्रामीण भारत में विस्तार और प्रतिस्पर्धा का नया दौर
अतिरिक्त राजस्व की उपलब्धता से अग्रणी कंपनियों को उन इलाकों में पैठ बनाने की वित्तीय ताकत मिलेगी जहाँ अब तक जाना व्यावहारिक नहीं माना जाता था. फोनपे के सह-संस्थापक राहुल चारी ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि एमडीआर की शुरुआत परिचालन लागत और देनदारियों की भरपाई करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मर्चेंट लेनदेन से मिलने वाले डेटा के आधार पर कंपनियां छोटे कारोबारियों को वित्तीय उत्पाद जैसे कि अनुकूलित लोन और क्रेडिट सुविधाएं पेश कर सकेंगी. दूसरी ओर, मोबिक्विक जैसे छोटे प्लेटफॉर्म्स के लिए भी निवेश और विस्तार के नए रास्ते खुले हैं. अब कंपनियां केवल यूजर-टू-यूजर ट्रांसफर के बजाय बड़े मूल्य वाले बिल भुगतान, टिकट बुकिंग और मर्चेंट पेमेंट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.
बाजार एकाधिकार पर नियामक निगरानी का खतरा
जहाँ एक तरफ यह राजस्व वृद्धि कंपनियों को नई ऊर्जा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ इससे बाजार में एकाधिकार की चिंताएं भी फिर से उभर आई हैं. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) पहले ही किसी एक प्लेटफॉर्म की बाजार हिस्सेदारी को 30 प्रतिशत तक सीमित करने के प्रस्ताव को दो बार टाल चुका है. अब इन दो दिग्गजों की बढ़ती वित्तीय ताकत को देखते हुए नियामकों का ध्यान एक बार फिर बाजार संतुलन की ओर जा सकता है.
ग्राहकों पर असर और कैश की वापसी की संभावनाएं
एमडीआर लागू होने के बाद इस बात की आशंका भी व्यक्त की जा रही थी कि व्यापारी इस खर्च का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे लोग फिर से नकद लेन-देन की ओर रुख कर सकते हैं. हालांकि, केंद्रीय बैंक, विश्लेषकों और व्यापारियों का मानना है कि कैश की वापसी की संभावना न के बराबर है.
नियमों के तहत व्यापारी सीधे तौर पर ग्राहकों से यह शुल्क नहीं वसूल सकते. मुंबई के व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं का कहना है कि लोग डिजिटल भुगतान के इतने अभ्यस्त हो चुके हैं कि इस मामूली लागत के कारण वे कैश का रुख नहीं करेंगे. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्राजील के पिक्स (Pix), चीन के अलीपे (Alipay) और सिंगापुर के पेनाउ (PayNow) जैसे पेमेंट सिस्टम में 0.6% से 1.5% तक मर्चेंट फीस ली जाती है, जिसकी तुलना में भारत का नया शुल्क ढांचा काफी व्यावहारिक माना जा रहा है.