मलेरिया: नवजातों के लिए पहली विशेष दवा को WHO की मंजूरी
जिनेवा । डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए दुनिया के सबसे कम उम्र के मरीजों के लिए विशेष रूप से विकसित पहली दवा 'आर्टेमेथर-लुमेफेंट्रिन' (Artemether-lumefantrine) को प्री-क्वालिफिकेशन (Prequalification) का दर्जा दे दिया है. यह विशेष फॉर्मूलेशन दो से पांच किलोग्राम वजन वाले नवजातों और छोटे शिशुओं के लिए तैयार किया गया है, जो अब तक इस बीमारी के इलाज में सबसे अधिक उपेक्षित समूह रहे हैं.
अब तक मलेरिया से पीड़ित शिशुओं का उपचार बड़े बच्चों के लिए बनी दवाओं से किया जाता था, जिसमें खुराक की मात्रा में त्रुटि, दुष्प्रभाव और विषाक्तता का उच्च जोखिम बना रहता था. WHO के इस निर्णय से अब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित दवा की पहुंच उन 30 करोड़ शिशुओं तक सुनिश्चित हो सकेगी, जो हर साल अफ्रीका जैसे मलेरिया-प्रभावित क्षेत्रों में जन्म लेते हैं.
इस अवसर पर WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि सदियों से मलेरिया ने समुदायों से उनके बच्चों और खुशहाली को छीना है, लेकिन अब नई वैक्सीन, उन्नत मच्छरदानी और शिशुओं के अनुकूल दवाओं के आने से तस्वीर बदल रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे जीवनकाल में मलेरिया का अंत अब केवल एक सपना नहीं बल्कि एक वास्तविक संभावना है, बशर्ते राजनीतिक और वित्तीय प्रतिबद्धता बनी रहे.
दवा के साथ-साथ, 14 अप्रैल 2026 को WHO ने तीन नए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDTs) को भी मंजूरी दी है. ये टेस्ट विशेष रूप से उन 'अदृश्य' मलेरिया परजीवियों की पहचान करने में सक्षम हैं, जिनमें HRP2 नामक प्रोटीन बनाने वाला जीन गायब हो गया था. हॉर्न ऑफ अफ्रीका के देशों में लगभग 80 प्रतिशत मामले इसी वजह से पकड़ में नहीं आ पा रहे थे, जिससे इलाज में देरी और मृत्यु का खतरा बढ़ गया था. नए टेस्ट 'pf-LDH' प्रोटीन को लक्षित करते हैं, जिससे अब सटीक निदान संभव होगा.
यह घोषणा 'विश्व मलेरिया दिवस 2026' के अभियान 'ड्रिवन टू एंड मलेरिया: नाउ वी कैन, नाउ वी मस्ट' के तहत की गई है. विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2025 के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में वैश्विक स्तर पर मलेरिया के 28.2 करोड़ मामले और 6,10,000 मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक हैं.
हालांकि 47 देश मलेरिया मुक्त हो चुके हैं, लेकिन दवा प्रतिरोध और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी जैसे कारकों से वैश्विक प्रगति की गति धीमी हुई है. इसके बावजूद, साल 2000 से अब तक लगभग 2.3 अरब संक्रमणों को रोका गया है और 1.4 करोड़ लोगों की जान बचाई गई है.
वर्तमान में 25 देश मलेरिया वैक्सीन का सफल संचालन कर रहे हैं और नई पीढ़ी की मच्छरदानियों का वितरण 84 प्रतिशत तक पहुंच गया है. नवजातों के लिए इस नई दवा की मंजूरी को स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा मलेरिया मुक्त भविष्य की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है.