महानदी जल विवाद: BJD ने BJP पर साधा निशाना
भुवनेश्वर । डेस्क: ओडिशा सरकार ने छत्तीसगढ़ के साथ लंबे समय से चले आ रहे महानदी नदी जल विवाद पर अपनी नवगठित उच्च-स्तरीय समिति की पहली बैठक 22 दिसंबर को शाम 4 बजे लोक सेवा भवन में बुलाई है.
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर गठित इस समिति की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव करेंगे. आठ सदस्यीय पैनल में प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं: राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाइन, सरकारी मुख्य सचेतक सरोज कुमार प्रधान (सभी भाजपा से), बीजद विधायक निरंजन पुजारी, संबलपुर से भाजपा विधायक जयनारायण मिश्रा, और कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस.
समिति का मुख्य उद्देश्य महानदी जल मुद्दे के सभी पहलुओं की गहन जांच करना और राज्य के चल रहे तकनीकी तथा प्रशासनिक प्रयासों को नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करना है.
2018 से महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के समक्ष मामला लंबित होने के बावजूद, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच विभिन्न स्तरों पर द्विपक्षीय चर्चाएं जारी हैं, और दोनों राज्यों ने इस वर्ष की शुरुआत में सौहार्दपूर्ण समाधान की इच्छा व्यक्त की थी.
विपक्ष के बीजद नेता प्रसन्न आचार्य ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की तीखी आलोचना करते हुए "षड्यंत्र" का आरोप लगाया और कहा कि यह महानदी नदी को "मारने" जैसा है, जो ओडिशा पर हमले के समान है. उन्होंने छत्तीसगढ़ पर ओडिशा की सहमति के बिना बैराज बनाने का आरोप लगाया और दोनों राज्यों के साथ-साथ केंद्र में भी भाजपा की सरकार होने के बावजूद कार्रवाई न होने पर सवाल उठाया.
आचार्य ने संभावित अदालत से बाहर के समझौते की शर्तों, न्यायाधिकरण मामले को वापस लेने और समाधान की समय-सीमा पर चिंताएं व्यक्त कीं.
ओडिशा में विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने महानदी जल विवाद को लेकर प्रस्तावित 'अदालत से बाहर समझौते' पर राज्य सरकार से पांच महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे हैं. बीजेडी ने यह सवाल छत्तीसगढ़ के साथ चल रहे इस दीर्घकालिक जल-विवाद के समाधान के लिए ओडिशा सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की पारदर्शिता पर चिंता व्यक्त करते हुए किए हैं.
बीजेडी के पांच प्रमुख प्रश्न इस प्रकार हैं:
समझौते के नियम और शर्तें: प्रस्तावित अदालत से बाहर समझौते के नियम और शर्तें क्या हैं?
ट्रिब्यूनल से केस वापसी: क्या ओडिशा सरकार का इरादा महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल से मामला वापस लेने का है?
राजनीतिक दलों से परामर्श: क्या सरकार बातचीत से पहले राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों और 'महानदी बचाओ आंदोलन' संगठनों को विश्वास में लेगी?
निर्माण कार्य पर रोक: क्या समझौते की बातचीत के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार महानदी और उसकी सहायक नदियों के ऊपरी हिस्सों में बैराजों का निर्माण रोकेगी?
मामले में तेजी: क्या राज्य सरकार लंबे समय से लंबित मामले में तेजी लाने के लिए ट्रिब्यूनल का रुख करेगी?
जवाब में, समिति के सदस्य और वरिष्ठ भाजपा विधायक जयनारायण मिश्रा ने सरकार का बचाव किया. उन्होंने रेखांकित किया कि यह सर्वदलीय समिति एक सक्रिय कदम है. उन्होंने बताया कि पिछली बीजद शासन के 24 साल के कार्यकाल के दौरान भी इसी तरह की समितियां गठित की गई थीं, लेकिन उनकी एक भी बैठक नहीं हुई. मिश्रा ने जोर देकर कहा कि राज्य की भविष्य की रणनीति पर आगामी बैठक में विस्तृत चर्चा होगी.
छत्तीसगढ़ में उद्गम और ओडिशा से व्यापक रूप से बहकर बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने वाली महानदी, कई जिलों में सिंचाई, कृषि और आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है. दोनों राज्यों की तकनीकी समितियों के सक्रिय रूप से शामिल होने और न्यायाधिकरण की सुनवाई निकट होने के कारण, इस समिति के विचार-विमर्श से संतुलित समाधान की दिशा में ओडिशा के दृष्टिकोण को आकार मिलने की उम्मीद है.