राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों की जमीन पर भू-माफिया की नजर, सरगुजा में FIR दर्ज
अंबिकापुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से विशेष संरक्षित पंडो जनजाति की पैतृक भूमि पर अवैध कब्जे और धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है. लखनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मांजा के आश्रित गांवों में रहने वाले इन परिवारों की जमीन को कूटनीति और फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़पने की कोशिश की गई है.
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बबरा खान, रफीक खान और रज्जाक खान समेत कुल सात नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
पीड़ित पंडो परिवारों का आरोप है कि भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर उनकी पुश्तैनी जमीनों पर अपना नाम दर्ज करा लिया था. जब स्थानीय ग्रामीणों ने इस जालसाजी का विरोध किया, तो आरोपियों ने न केवल उन्हें जान से मारने की धमकी दी, बल्कि जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित भी किया.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी एक्ट) के तहत मामला पंजीबद्ध किया है.
यह विवाद तब और गरमा गया जब भाजपा जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया और वरिष्ठ नेता आलोक दुबे ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संभागीय कमिश्नर के समक्ष उठाया.
प्रशासनिक सक्रियता के बाद अब इस मामले में 19 अन्य संदिग्धों को भी नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है. जांच में यह भी सामने आया है कि मांजा के अलावा नरकालों और लोसली जैसे पड़ोसी गांवों में भी इसी तरह से आदिवासियों की जमीनें हड़पने के प्रयास किए गए हैं.
स्थानीय पंडो परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से राजाकटेल और आसपास के क्षेत्रों में खेती कर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं. शासन द्वारा उन्हें वन अधिकार पट्टा देने की प्रक्रिया भी विचाराधीन है, लेकिन इसी बीच रसूखदारों ने उनकी जमीन पर कब्जा करने की नीयत से फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया.
फिलहाल, पुलिस अन्य संदिग्धों की संलिप्तता की जांच कर रही है और प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है.