कोलकाता: सड़कों से हटेंगे मुगल, पठान और ब्रिटिश शासकों के नाम
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में एक बड़ा एलान करते हुए कहा है कि कोलकाता में अब किसी भी सड़क या इलाके का नाम मुगलों, पठानों या अत्याचारी ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रहेगा. सरकार ने इसके लिए एक विशेष समीक्षा समिति का गठन किया है, जो शहर की सड़कों और स्थानों के नामों की समीक्षा करेगी.
इस समिति की कमान स्वामी प्रदीप्तानंद (कार्तिक महाराज) को सौंपी गई है. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि समिति को आम जनता भी अपने सुझाव भेज सकती है और अब केवल 'सच्चे देशभक्तों' के नाम पर ही सड़कों के नाम रखे जाएंगे.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिस्टर निवेदिता के अलावा किसी भी विदेशी नाम को नहीं रखा जाएगा, लेकिन एपीजे अब्दुल कलाम जैसे सच्चे देशभक्तों का पूरा सम्मान किया जाएगा क्योंकि सरकार बंगाली संस्कृति और गौरव को मिटने नहीं देगी.
यह पूरा विवाद कोलकाता नगर निगम द्वारा पार्क सर्कस इलाके की प्रमुख सड़क 'सुहरावर्दी एवेन्यू' का नाम बदलकर 'गोपाल मुखर्जी रोड' किए जाने के बाद शुरू हुआ. विपक्ष ने सरकार पर इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है.
विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, जयराम रमेश और माकपा (सीपीआई-एम) ने तर्क दिया है कि सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम 1946 के कलकत्ता दंगों से जुड़े पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर नहीं था.
इतिहास का हवाला देते हुए विपक्ष और इतिहासकारों (जैसे जवाहर सरकार और किंगशुक चटर्जी) का कहना है कि यह सड़क साल 1932 में कोलकाता विश्वविद्यालय के पहले मुस्लिम उप-कुलपति और प्रसिद्ध चिकित्सक सर हसन सुहरावर्दी (हुसैन शहीद सुहरावर्दी के चाचा) के नाम पर रखी गई थी.
हालांकि, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्वतंत्रता सेनानी बीना दास के संदर्भों का हवाला देते हुए विपक्ष के दावों को खारिज कर दिया और कहा कि सुहरावर्दी नाम अब नहीं रहेगा. विपक्ष इसे भाजपा सरकार की 'अधूरे इतिहास' पर आधारित राजनीति बता रहा है, जबकि सरकार इसे ऐतिहासिक भूलों को सुधारने का कदम मान रही है.