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केन्या: 100 साल पुरानी 'टाटा केमिकल्स' को देश छोड़ने का आदेश, क्या है विवाद

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24 सित. 2026, 06:35 AM 4 मिनट में पढ़ें 3

टाटा केमिकल्स- केन्या
टाटा केमिकल्स- केन्या

नई दिल्ली । डेस्क: पूर्वी अफ्रीका के देश केन्या के मागाडी शहर में एक सदी से भी अधिक समय से चला आ रहा सोडा एश (Soda Ash) का खनन कारोबार अब बड़े संकट में घिर गया है. केन्या सरकार ने भारतीय बहुराष्ट्रीय समूह 'टाटा' की सहायक कंपनी 'टाटा केमिकल्स मागाडी लिमिटेड' के खनन संचालन को निलंबित कर दिया है. इसके साथ ही राष्ट्रपति विलियम रुटो ने कंपनी को क्षेत्र छोड़ने का कड़ा निर्देश जारी किया है. सरकार का कहना है कि कंपनी दशकों से स्थानीय संसाधनों का दोहन तो कर रही है, लेकिन इसका वाजिब लाभ न तो देश के खजाने को मिल पा रहा है और न ही स्थानीय मासाई समुदाय के लोगों को.


नए खनन कानूनों के उल्लंघन का आरोप


केन्याई माइनिंग कैबिनेट सचिव हसन जोहो के अनुसार, साल 2010 के नए संविधान और माइनिंग एक्ट के तहत यह पाया गया कि टाटा केमिकल्स ने वैध मिनरल राइट्स के लिए समय पर आवेदन नहीं किया था और वह केवल अपनी पुरानी जमीन लीज (लैंड कन्सेशन) के भरोसे काम कर रही थी. हालांकि कंपनी ने जुलाई 2024 में अपना पहला औपचारिक आवेदन दिया था, लेकिन सरकार का रुख सख्त है.

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सरकार का स्पष्ट कहना है कि अतीत में अनदेखी होने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कानूनों का पालन न किया जाए. इसके अलावा रॉयल्टी भुगतान, स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी और स्थानीय सामानों की खरीद न करने जैसे कई गंभीर उल्लंघन भी जांच में सामने आए हैं.


केवल कच्चे माल के निर्यात पर सरकार को ऐतराज


राष्ट्रपति विलियम रुटो और केन्याई प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि अब देश के संसाधनों को केवल कच्चे माल के रूप में विदेशों में निर्यात न किया जाए. सरकार चाहती है कि केन्या में ही कांच और केमिकल बनाने वाले बड़े विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए जाएं, जिससे देश में मूल्य संवर्धन हो और स्थानीय युवाओं को बेहतर रोजगार मिले.


इसी कड़ी में काजियाडो काउंटी के गवर्नर जोसेफ ओले लेंकू ने राष्ट्रपति के इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि कंपनी पर जमीन के बकाए किराए का भुगतान करना अनिवार्य है और स्थानीय प्रशासन को वार्ता की टेबल पर पूरी भागीदारी मिलनी चाहिए.


स्थानीय आबादी के सामने रोजी-रोटी और बुनियादी सुविधाओं का संकट


मागाडी शहर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से टाटा केमिकल्स के इर्द-गिर्द घूमती है. यहाँ के स्थानीय निवासी इस फैसले को लेकर असमंजस और चिंता में हैं. जहाँ एक ओर कुछ निवासियों की शिकायत है कि कंपनी ने कई पीढ़ियों से संसाधन निकालने के बावजूद स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं बनने दिया,


वहीं दूसरी ओर एक बड़ा वर्ग इस बात से आशंकित है कि यदि कंपनी रातों-रात चली गई तो उनकी दिनचर्या ठप हो जाएगी. वर्तमान में इस सुदूर और सूखे क्षेत्र में पीने का पानी, अस्पताल, स्कूल और स्कॉलरशिप जैसी बुनियादी सुविधाएं टाटा केमिकल्स द्वारा ही संचालित की जा रही हैं.


संयुक्त तकनीकी समिति के जरिए समाधान की तलाश


इस गतिरोध के बीच टाटा केमिकल्स ने कहा है कि उसने सरकार द्वारा जारी निलंबन नोटिस पर अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत कर दिया है और वह केन्याई कानूनों तथा नियामकों का पूरा सम्मान करती है. विवाद का रास्ता निकालने के लिए फिलहाल एक 'संयुक्त तकनीकी समिति' (Joint Technical Committee) का गठन किया गया है.


यह समिति सामुदायिक विकास समझौतों, रॉयल्टी भुगतान और स्थानीय प्रसंस्करण सुविधाओं जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रही है. फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टाटा केमिकल्स नियमों का पालन कर अपना संचालन बचा पाती है या मागाडी में 113 साल पुराने इस अध्याय का अंत हो जाएगा.


टाटा केमिकल्स यहां क्या करती है


टाटा केमिकल्स द्वारा झील से प्राकृतिक रूप से 'ट्रोना' (Trona) नामक खनिज (सोडियम सेस्क्विकार्बोनेट - Sodium Sesquicarbonate) का खनन/निकासी (Dredging) किया जाता है. मागाडी स्थित प्रोसेसिंग प्लांट में इस ट्रोना को धोकर, पीसकर और कैल्साइन (गर्म) करके 'सोडा एश' (Soda Ash / Sodium Carbonate) तैयार किया जाता है. यह सोडा एश कांच उद्योग (Glass Manufacturing), साबुन व डिटर्जेंट बनाने और विभिन्न औद्योगिक रसायनों के निर्माण में एक प्राथमिक कच्चा माल है. टाटा की यह इकाई पूरे अफ्रीका महाद्वीप में सोडा एश की सबसे बड़ी उत्पादक मानी जाती है.


ट्रोना के अलावा, कंपनी मागाडी झील के खारे पानी से सौर वाष्पीकरण की प्रक्रिया द्वारा साधारण नमक (Sodium Chloride - NaCl) का निष्कर्षण और प्रसंस्करण भी करती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP