जयराम रमेश का तंज- 'चुनाव संभाल रहे ज्ञानेश, अर्थव्यवस्था के लिए चाहिए नया ज्ञान'
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने देश की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जरिए चुनाव का प्रबंधन तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 'नए ज्ञान' की सख्त जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर माहौल इतना निराशाजनक हो चुका है कि अब सरकार के समर्थक भी खुलकर अपनी चिंताएं जाहिर करने लगे हैं.
Our statement on the perilous state of the Indian economy amidst the PM’s toffee distribution and his pious sermons to the public pic.twitter.com/L4cz7KPUcz
जयराम रमेश ने कहा कि देश में महंगाई का अनुमान तेजी से ऊपर जा रहा है, जबकि विकास दर के अनुमानों में गिरावट आ रही है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और आपूर्ति श्रृंखला इस कदर चरमरा गई है कि प्रधानमंत्री को खुद उपभोक्ताओं से खपत कम करने की अपील करनी पड़ रही है.
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री के इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को टॉफी देने के हालिया वाकये पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पीएम जनता के सामने सिर्फ उपदेश देने और टॉफियां बांटने में व्यस्त हैं, जबकि देश के पैरों तले से जमीन खिसक रही है. उन्होंने आर्थिक नीति में आमूल-चूल बदलाव की मांग करते हुए कहा कि मोदी सरकार के पास अब आत्म-प्रशंसा के अलावा कोई नया विचार नहीं बचा है.
कांग्रेस ने रेखांकित किया कि निजी निवेश में बढ़ोतरी के बिना आर्थिक विकास को गति देना असंभव है. उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक मजदूरी में ठहराव के कारण उपभोक्ता मांग घट गई है, जिससे कॉर्पोरेट जगत के पास निवेश करने का कोई ठोस कारण नहीं है.
इसके अलावा, कर अधिकारियों की छापेमारी, नोटिस और नीतिगत अस्थिरता के कारण व्यापारिक समुदाय में डर और अनिश्चितता का माहौल है.
रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि चीन से होने वाले सस्ते आयात की डंपिंग ने स्थानीय विनिर्माण क्षेत्र को बर्बाद कर दिया है, और चुनिंदा मित्र उद्योगपतियों के पक्ष में किए जा रहे फैसलों से क्रोनी कैपिटलिज्म (साठगांठ वाली पूंजीवाद) को बढ़ावा मिल रहा है.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कॉर्पोरेट टैक्स रिकॉर्ड निचले स्तर पर होने और कंपनियों की कमाई रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद जमीन पर वास्तविक निवेश गायब है और निवेशक विदेशों का रुख कर रहे हैं.